स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय खेल जगत के लिए बुधवार का दिन बेहद दुखद रहा। पांच बार के ओलंपियन, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता, वरिष्ठ खेल प्रशासक और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित निशानेबाज राजा रणधीर सिंह का बुधवार सुबह नई दिल्ली में 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
18 अक्टूबर 1946 को जन्मे राजा रणधीर सिंह भारतीय निशानेबाजी के इतिहास के सबसे बड़े नामों में गिने जाते हैं। उन्होंने पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 1978 बैंकॉक एशियाई खेलों में पुरुष ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाले भारत के पहले निशानेबाज बने।
इसके बाद 1982 नई दिल्ली एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक और टीम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया।
खेल प्रशासक के रूप में भी राजा रणधीर सिंह का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 2001 से 2014 तक वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) में भारत के एकमात्र प्रतिनिधि रहे। इसके बाद उन्हें मानद सदस्य बनाया गया। उनके प्रयासों से भारत में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिनमें 2003 अफ्रो-एशियाई खेल और 2010 राष्ट्रमंडल खेल प्रमुख हैं।
राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) के अध्यक्ष कालिकेश नारायण सिंह देव ने राजा रणधीर सिंह के निधन को भारतीय निशानेबाजी और पूरे ओलंपिक आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि राजा रणधीर सिंह दूरदर्शी खेल प्रशासक थे, जिन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा,
“यह केवल निशानेबाजी ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय ओलंपिक खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। राजा रणधीर सिंह जी भारतीय खिलाड़ियों के सबसे बड़े समर्थक और प्रेरक थे। एक खिलाड़ी के रूप में उनका रिकॉर्ड अपने आप में मिसाल है। खेल प्रशासक के रूप में उन्होंने भारतीय और एशियाई ओलंपिक आंदोलन को नई दिशा दी। आज भारतीय खिलाड़ियों को जो सुविधाएं, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिल रहा है, उसमें पिछले चार दशकों में उनके योगदान की बड़ी भूमिका रही है।”
एनआरएआई की ओर से उन्होंने राजा रणधीर सिंह के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।













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