डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए लाल किले के पास कार धमाके के मामले में जांच एजेंसियों ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। राज्य जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले से तुफैल नियाज भट नामक इलेक्ट्रीशियन को हिरासत में लिया है। भट पर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का सदस्य होने का संदेह है। उसे औद्योगिक क्षेत्र से हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मामले की जांच के दौरान, धमाके की साजिश में तुफैल नियाज भट की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं। इस सिलसिले में जांच एजेंसियां आतंकी मॉड्यूल में उसकी भूमिका की विस्तार से पड़ताल कर रही हैं। दिल्ली में हुए इस कार धमाके में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
इससे पहले एनआईए ने गुरुवार को तीन डॉक्टरों और एक धार्मिक उपदेशक को हिरासत में लिया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने धमाके के बाद मुजम्मिल गनई, अदील राथर, शाहीना सईद और मौलवी इरफान अहमद वागे को गिरफ्तार किया था। एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि सभी आरोपियों को पटियाला हाउस अदालत में पेशी के बाद श्रीनगर में हिरासत में लिया गया।
एनआईए के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन सभी ने आतंकवादी हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए और अन्य घायल हुए। अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या छह हो गई है। एनआईए ने 11 नवंबर को इस मामले की जांच अपने हाथों में ली थी।
जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर-उन-नबी विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था और इसे अली के नाम पर खरीदा गया था। जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश ने भी पूछताछ में माना कि उसे उमर ने आत्मघाती हमलावर बनने के लिए उकसाने की कोशिश की थी, लेकिन उसने योजना से इंकार कर दिया। वानी पर जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है।
अदील राथर के बयान के अनुसार, उमर कट्टरपंथी था और अपने अभियानों के लिए आत्मघाती हमलावर की आवश्यकता पर जोर दे रहा था। इसके बाद श्रीनगर पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में वानी को हिरासत में लिया। पूछताछ में वानी ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में वह कुलगाम की एक मस्जिद में डॉक्टर मॉड्यूल के साथ मिला था।
इस साल अप्रैल में वानी ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में आत्महत्या को हराम मानने के कारण आत्मघाती हमलावर बनने से इनकार किया। जांच के दौरान फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया गया।
इस घटनाक्रम की शुरुआत 18-19 अक्टूबर की रात हुई, जब श्रीनगर के बाहरी क्षेत्रों में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए गए, जिसमें घाटी में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले की चेतावनी दी गई थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने मौलवी इरफान का नाम बताया, जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद फरीदाबाद से गनई और सईद को गिरफ्तार किया गया, जबकि अदील राथर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सरकार की तेज़ कार्रवाई को दर्शाती है।













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