नई दिल्ली: आरबीआइ ने एक बार फिर दोहराया है कि पुरानी पेंशन स्कीम (ओपीएस) को राज्यों में लागू करना राज्यों के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक बड़ा खतरा है। सोमवार को आरबीआइ ने राज्यों के वित्त व्यवस्था पर सालाना रिपोर्ट जारी की है जिसमें कोरोना महामारी के बाद राज्यों की वित्तीय स्थिति को काफी आशाजनक बताया है लेकिन ओपीएस को लेकर अपनी चिंता साफ तौर पर जाहिर की है।
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कुछ राज्यों में ओपीसी को लागू करने का देश के एक बड़े हिस्से पर खतरा बनता दिख रहा है। इसे लागू करने से वित्तीय बचत की जो बातें कही जा रही हैं वह अल्पकालिक है। आरबीआइ ने कहा है कि वर्तमान के खतरे को भविष्य के लिए टालने से राज्यों के समक्ष यह खतरा है कि भविष्य में एक बड़े दायित्व को उन्हें पूरा करना होगा और इसके लिए उन्होंने कोई कोष का इंतजाम भी नहीं किया है। वैसे पहले भी केंद्रीय बैंक ने एक रिपोर्ट में पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।
यह ताजी रिपोर्ट तब आई है जब कांग्रेस की तरफ से ओपीएस को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया जा चुका है। इस साल कुछ बड़े राज्यों में चुनाव है और कांग्रेस ने कहा है कि वह वहां भी पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करेगी। दूसरी तरफ, कई आर्थिक जानकार यह कह चुके हैं कि यह कदम राज्यों के भविष्य पर एक बड़ा बोझ लादने जैसा है। आरबीआइ ने कोविड बाद राज्यों के वित्तीय प्रबंधन की सराहना की है। कहा है कि इनकी वित्तीय स्थिति में भारी सुधार है। इसका श्रेय राजस्व संग्रह में अच्छी खासी वृद्धि और बेहतर व्यय प्रबंधन को दिया गया है।
नकदी फ्लो बेहतर होने की वजह से राज्यों ने ज्यादा कर्ज भी नहीं लिया है। केंद्र की तरफ से राज्यों को समय पर जीएसटी का भुगतान होने और दो महीने अग्रिम भुगतान होने से भी राज्यों को मदद मिली है। अंत में केंद्रीय बैंकों को सामाजिक विकास के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रीन इनर्जी पर ज्यादा खर्च करने की सलाह दी है ताकि वो अपने भविष्य की नींव को ज्यादा मजबूत कर सकें। राज्यों को यह भी कहा गया है कि अभी उनका हिसाब किताब बेहतर है ऐसे में उन्हें चुनौतीपूर्ण समय के लिए एक कोष का गठन करना चाहिए।












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