नई दिल्ली: केंद्र सरकार छोटे दुकानदारों के लिए आगामी बजट में सस्ता कर्ज योजना ला सकती है। इसके अलावा इस क्षेत्र के लिए नियमों में भी कुछ ढील दी जा सकती है। इस मामले से वाकिफ दो सूत्रों का कहना है कि इस बड़े वोटर आधार को लुभाने के लिए सरकार नई योजना ला सकती है। बड़ी ई-कामर्स कंपनियों के आने से इन छोटे दुकानदारों का कारोबार कम हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि 2024 के आम चुनाव से पहले अगले माह पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में इस प्रस्ताव की घोषणा हो सकती है।
प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे भौतिक खुदरा क्षेत्र में विकास को पुनर्जीवित करना है जिसको अमेजन, फ्लिपकार्ट, टाटा समूह के बिगबास्केट और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के आने से झटका लगा है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार एक ऐसी नीति पर काम कर रही है जिसके तहत कम ब्याज दर पर आसानी से कर्ज दिया जा सके। इसमें इन्वेंटरी (स्टाक) की एवज में लोन देने का विकल्प भी शामिल है। हालांकि, न तो वाणिज्य मंत्रालय ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही अधिकारी ने यह बताया कि बैंकों को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए किस आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
इसके अलावा इस नीति में नई दुकानों के लिए लाइसेंस आवश्यकता में बदलाव और लाइसेंस नवीनीकरण की साधारण आनलाइन प्रक्रिया का प्रस्ताव आ सकता है।नोटबंदी-जीएसटी से प्रभावित हुए छोटे कारोबारअर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और कर आधार बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने 2016 में नोटबंदी की घोषणा की थी। 2017 में केंद्र ने जीएसटी प्रणाली लागू की। इससे छोटे कारोबारों पर बुरा असर पड़ा।
कोरोना महामारी से छोटे कारोबार प्रभावित रहे, जबकि दिग्गज आनलाइन कंपनियों के कारोबार में वृद्धि हुई। हालांकि, कोरोना से प्रभावित रेहड़ी-पटरी वालों को राहत देने के लिए केंद्र ने 2020 में गारंटी मुक्त एक वर्ष की अवधि के लोन के लिए पीएम-स्वनिधि योजना लांच की थी। रिटेलर्स एसोसिएशन आफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक देश के रिटेल क्षेत्र में ई-कामर्स की वृद्धि दर करीब 19 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी जो अभी सात प्रतिशत के करीब है।













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