पिंपरी–चिंचवड़, पुणे.होली का पावन पर्व, रंगों का उत्सव और इसी उत्सव के अवसर पर पिंपरी चिंचवड़ भी अध्यात्म के रंगों में आज रंगा नजर आ रहा था। और हो भी क्यों ना युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन प्रवास से पूरा शहर एक अलग ही उमंग से भरा हुआ है। एलप्रो इंटरनेशनल स्कूल में बड़ी संख्या में दिनभर लोगों का आवागमन इस बात को मानों दर्शा रहा है कि क्षेत्र वासी आचार्य श्री के इस चार दिवसीय प्रवास का पूरा पूरा लाभ प्राप्त करना चाहते है। कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। प्रातः वृहद मंगलपाठ हो या मुख्य प्रवचन कार्यक्रम, मध्यान्ह सेवा से लेकर सांय चरण स्पर्श, अर्हत वंदना के बाद भी श्रद्धालुओं से परिसर भरा रहता है।
प्रवास के तृतीय दिन आज प्रातः आचार्य प्रवर नगर में भ्रमण हेतु पधारे। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में तीर्थंकर समवसरण में धर्म देशना देते हुए गुरुदेव ने कहा– जीवन में ज्ञान स्थान प्रथम है एवं उसके बाद आचार का स्थान आता है। ज्ञान अनंत है, उसका कोई आर-पार नहीं होता। ज्ञान विशाल है और समय सीमित ऐसे में पूरे ज्ञान को कैसे प्राप्त किया जाए यह प्रश्न हो सकता है। इसलिए व्यक्ति को सारभूत ज्ञान ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। उत्तराध्यन के बाद दशवेआलियं ऐसा ही आगम सूत्र है जिसे सारभूत आगम माना जा सकता है। जैसे हंस पानी में से सारभूत तत्वों को ग्रहण कर लेता है ठीक उसी प्रकार अपनी विधा में सारभूत ज्ञान को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि सम्बद्ध विषयों का ज्ञान करने से उस क्षेत्र में दक्षता हासिल की जा सकती है। ऐसे तो ज्ञान का कोई पार नहीं होता, पर जिसके लिए जिसकी उपयोगिता हो वह उस विषय का ज्ञान करे व उसमें दक्ष बने। साधु के लिए आगम का ज्ञान उपयोगी हो सकता है। अध्यात्म में नव तत्व के ज्ञान की जानकारी का श्रावक समाज के लिए भी बड़ा महत्व है। यदि श्रावक को इसका ज्ञान नहीं होता तब तक मानों अधूरापन है। जीव अजीव को जानने वाला ही संयम को जान सकता है। दर्पण है तो दृष्टि भी होनी चाहिए। आँखें हो, दर्पण हो व आवरण न हो तो चेहरा साफ देखा जा सकता है। हम अपने सम्यक ज्ञान का विकास करते रहें। ज्ञान का विकास और आचार की निर्मलता से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
तत्पश्चात आचार्य प्रवर ने होली के संदर्भ में परिषद को नमस्कार महामंत्र के पदों का रंगों के साथ ध्यान प्रयोग करवाया।
इस अवसर पर बहिर्विहार से समागत डॉ. साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी एवं सामूहिक गीत का संगान किया। पिंपरी चिंचवड़ श्रावक समाज की ओर से श्री सुनील नाहर, अणुव्रत समिति से श्री विकास छाजेड़ ने अपने विचार व्यक्त किए।













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