नई दिल्ली: राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को एक संक्षिप्त किंतु उल्लेखनीय हल्का क्षण सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की एक चुटीली टिप्पणी पर मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। कुछ समय के लिए सदन का वातावरण सहज हो गया और सदस्यों के बीच हल्की हंसी सुनाई दी।
यह प्रसंग उस समय आया जब अठावले ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को लेकर टिप्पणी की। उनके वक्तव्य में व्यंग्य और हल्के हास्य का समावेश था, जो प्रायः उनकी वक्तृत्व शैली का अंग माना जाता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उपसभापति हरिवंश के संचालन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही को संयम, संतुलन और धैर्य के साथ संचालित किया है। उन्होंने यह भी संकेत किया कि इस प्रकार का संचालन संसदीय विचार-विमर्श को सुव्यवस्थित बनाए रखने में सहायक होता है।
संसदीय कार्यवाही सामान्यतः गंभीर और औपचारिक होती है, किंतु बीच-बीच में आने वाले ऐसे क्षण वातावरण को कुछ हद तक सरल और स्वाभाविक बना देते हैं। अठावले की टिप्पणियां पूर्व में भी अनेक बार सदन का ध्यान आकर्षित करती रही हैं, जिनमें हास्य के माध्यम से संवाद स्थापित करने का प्रयास परिलक्षित होता है।
राजनीतिक मतभेदों के बीच इस प्रकार के क्षण यह भी दर्शाते हैं कि संसदीय परंपरा में संवाद, संयम और मानवीय सहजता का स्थान बना रहता है।













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