नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा शंभू बार्डर खोलने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने इस मसले पर निर्णय लेने के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति में अधिकारियों, किसानों और सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल करने का निर्देश दिया गया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की विभिन्न मांगों पर विचार करने के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने सहित अन्य मांगों पर विचार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उस समय उठाया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में से एक यह है कि उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को कानूनी दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (24 जुलाई) को स्वतंत्र व्यक्तियों की एक समिति बनाने की मंशा व्यक्त ताकि पंजाब-हरियाणा सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकारों के साथ बातचीत कर मुद्दों का समाधान ढूंढ़ सके। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों से उन उपयुक्त व्यक्तियों के नाम सुझाने को कहा जिन्हें समिति में शामिल किया जा सकता है। इसने साथ ही अंबाला के पास शंभू सीमा पर एक सप्ताह के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जहां किसान 13 फरवरी से डेरा डाले हुए हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि एक ‘‘तटस्थ अंपायर’’ की आवश्यकता है जो किसानों तथा सरकार के बीच विश्वास पैदा कर सके। पीठ में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां भी शामिल रहे। पीठ ने कहा, ‘‘आपको किसानों से बातचीत करने के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। अन्यथा वे दिल्ली क्यों आएंगे? आप यहां से मंत्रियों को भेज रहे हैं और उनके नेक इरादों के बावजूद विश्वास की कमी है।’’ न्यायालय ने कहा, ‘‘एक सप्ताह के अंदर उचित निर्देश दिए जाएं। तब तक शंभू बॉर्डर पर स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए सभी पक्षकारों को प्रदर्शन स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने दें।’’
सुप्रीम कोर्ट पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ हरियाणा राज्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। दरअसल इससे पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शंभू सीमा को खोलने का निर्देश दिया था, जिसे इस साल फरवरी में पंजाब से हरियाणा में प्रदर्शनकारी किसानों की आवाजाही को रोकने के लिए बंद कर दिया गया था। किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी जैसी मांगों को लेकर वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।













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