जयपुर: राजस्थान में शिया समुदाय ने इस बार ईद‑उल‑फितर को पारंपरिक उत्सव के रूप में नहीं मनाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत इस साल मिठाइयाँ नहीं बनेंगी, नए कपड़े नहीं पहने जाएंगे और नमाज़ के दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जाएगा।
शिया जामा मस्जिद, आमेर रोड के इमाम सैयद नाजिश अकबर काजमी ने बताया, “खुशियाँ मनाना तब उचित नहीं जब निर्दोष लोगों की जान जा रही है और विश्व में असमानता और अन्याय बढ़ रहा है।”
धार्मिक नेताओं का कहना है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत विरोध का प्रतीक नहीं है, बल्कि इंसानियत और न्याय के लिए वैश्विक घटनाओं पर प्रतिक्रिया है। शिया जामा मस्जिद के मुत्वल्ली सैयद कासिम तकवी ने कहा, “हमारा यह निर्णय सामाजिक और वैश्विक स्तर पर संवेदनशीलता और एकजुटता का संदेश है।”
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार की ईद का यह स्वरूप सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और दर्शाता है कि धार्मिक समुदाय वैश्विक घटनाओं पर अपनी राय और असंतोष खुले तौर पर व्यक्त कर रहा है।













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