जयपुर: रविवार को भिक्षु साधना केंद्र, श्याम नगर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसका विषय था “समाज के नवनिर्माण में महिलाओं की भूमिका”।
इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने कहा कि ममता, समता, विनम्रता, सहनशीलता और संवेदनशीलता जैसी गुण महिलाओं में स्वाभाविक रूप से विद्यमान होते हैं। उन्होंने बताया कि यह महिलाओं के मौलिक गुण हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। आज शिक्षा और आधुनिकता के युग में इन गुणों का ग्राफ घटता जा रहा है, जो समाज के लिए चिंताजनक विषय है। मुनि श्री जी ने कहा कि समाज का नवनिर्माण तभी संभव है जब महिलाएं अपने मूल गुणों को बनाए रखने और बढ़ावा देने का प्रयास करेंगी।
मुनि श्री तत्व रुचि जी ने महिलाओं के विभिन्न रूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “मां” महिला का सर्वोच्च रूप है।” उन्होंने आगे कहा:
“ऊपर जिसका अंत नहीं, उसे आसमां कहते हैं और धरती पर जिसका अंत नहीं, उसे मां कहते हैं।”
मुनि श्री संभव कुमार जी ने भी महिलाओं की सृजनात्मक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मां प्रेम, वात्सल्य, धैर्य, ममता और करुणा का अक्षय कोष होती हैं। संतान को जो सुख, शांति और सहानुभूति मां से मिलती है, वैसी पिता से मिलना कठिन है। उन्होंने यह भी बताया कि नारी सृजन रूपा है और समाज के नवनिर्माण में उसकी भूमिका अहम् है। इसलिए महिलाओं को सशक्त बनाना इस युग की मांग है।
संगोष्ठी की शुरुआत नमस्कार महामंत्र और जय महावीर भगवान के गीत से हुई। कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन और मंगलपाठ के साथ हुआ। मौके पर कई सम्माननीय श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थीं, जिन्होंने कार्यक्रम की आध्यात्मिक और सामाजिक प्रासंगिकता की सराहना की।
यह कार्यक्रम महिलाओं के मौलिक गुणों को समझने और समाज में उनके सशक्तिकरण की आवश्यकता को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।













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