डेस्क : एफआईआर दर्ज कराने और उससे जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि किसी भी शिकायतकर्ता को एफआईआर से संबंधित मामलों में सीधे हाई कोर्ट का रुख नहीं करना चाहिए, बल्कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि पुलिस किसी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो संबंधित व्यक्ति को सबसे पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना चाहिए। दंड प्रक्रिया संहिता में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, जिन्हें दरकिनार कर सीधे उच्च न्यायालय पहुंचना न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रणाली एक संरचित ढांचे पर आधारित है, जिसमें निचली अदालतों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की प्रवृत्ति इस व्यवस्था को कमजोर करती है और अनावश्यक रूप से उच्च न्यायालयों पर दबाव बढ़ाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि हर शिकायतकर्ता सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने लगेगा, तो इससे मामलों की सुनवाई में देरी होगी और न्यायिक संसाधनों का दुरुपयोग भी बढ़ेगा। इसलिए पहले वैधानिक उपायों को अपनाना आवश्यक है।













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