डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है, जिसमें मनोरंजन और आतिथ्य से जुड़े प्रतिष्ठानों में बाल श्रम पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों में बच्चे अक्सर शोषण और दुरुपयोग के जोखिम में रहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली शामिल हैं, ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इसे गंभीर विषय बताया।
यह जनहित याचिका ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ द्वारा दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि केंद्र सरकार बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उन क्षेत्रों की सूची का विस्तार करे, जहां बाल रोजगार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
याचिका में विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, डांस ट्रूप, नौटंकी प्रदर्शन, मसाज पार्लर, स्पा, सैलून और इसी तरह के प्रतिष्ठानों में रोजगार या प्रदर्शन को अधिनियम की अनुसूची के भाग ‘ए’ में शामिल किया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सके।
इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि मसाज पार्लर, जिम्नेजियम, मनोरंजन केंद्र और कुछ चिकित्सा सुविधाओं जैसे क्षेत्रों को “नियंत्रित श्रेणी” से हटाकर “प्रतिबंधित श्रेणी” में शामिल किया जाए, ताकि वहां बच्चों के रोजगार की अनुमति पूरी तरह समाप्त हो सके।
याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से यह भी आग्रह किया गया है कि ऐसे प्रतिष्ठानों में काम करते पाए जाने वाले बच्चों के बचाव और पुनर्वास के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहां मनोरंजन के नाम पर बच्चों का उपयोग किया जाता है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान कानून में मौजूद खामियों के कारण कई ऐसे क्षेत्र बचे हुए हैं जहां बच्चों के शोषण की आशंका बनी रहती है, इसलिए कानून को और सख्त बनाने और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।













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