डेस्क: केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहरों में शीर्ष स्थान पर रहा, जबकि सूरत और नवी मुंबईदूसरे और तीसरे पायदान पर रहे। 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की कैटिगरी में नोएडा पहले स्थान पर, चंडीगढ़ दूसरे स्थान पर और मैसूर तीसरे स्थान पर रहा। 50 हजार से 3 लाख जनसंख्या वाले शहरों की बात करें तो नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) इलाका अव्वल रहा।
देशभर में हुए स्वच्छ सर्वेक्षण के नतीजे बृहस्पतिवार को घोषित किए गए। 2024-25 में इंदौर ने लगातार आठवीं बार स्वच्छता का ताज अपने नाम किया। विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान ग्रहण किया। कार्यक्रम का आयोजन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से किया गया था। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
नौ सालों से हो रहा है स्वच्छ सर्वेक्षण
शहरी भारत की स्वच्छता यात्रा को नई दिशा देने वाला ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ पिछले नौ वर्षों से सफाई को लेकर देश के नजरिए को बदल रहा है। वर्ष 2016 में केवल 73 नगरीय निकायों से शुरू हुआ यह अभियान अब 4,500 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है। इस बार के सर्वेक्षण का फोकस “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की अवधारणा पर रहा। 45 दिनों तक चले मूल्यांकन में 3,000 से अधिक ट्रेंड लोगों ने मूल्यांकन के लिए देशभर के हज़ारों वॉर्डों का दौरा किया और 11 लाख से ज्यादा घरों का निरीक्षण कर स्वच्छता की वास्तविक तस्वीर पेश की।
2024 के सर्वेक्षण में नागरिक भागीदारी अभूतपूर्व रही। करीब 14 करोड़ लोगों ने सीधे संवाद, स्वच्छता ऐप, माईगव पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाई। यह न सिर्फ शहरों की सफाई व्यवस्था को दर्शाता है, बल्कि नागरिकों की बदलती सोच और स्वच्छता के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को भी उजागर करता है। इस वर्ष स्वच्छता के व्यापक मूल्यांकन के लिए एक सुव्यवस्थित डिजिटल ढांचा अपनाया गया है, जिसमें 54 सूचकांकों और 10 स्पष्ट मापदंडों के जरिये सेवा वितरण और कचरा प्रबंधन की समग्र समीक्षा की गई है।
नई पहल: सुपर स्वच्छ लीग
स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शहरों को पहचान देने के लिए इस बार ‘सुपर स्वच्छ लीग’ की शुरुआत की गई है। इसमें वे शहर शामिल किए गए हैं, जो बीते तीन वर्षों में किसी न किसी साल शीर्ष तीन में शामिल रहे हों और वर्तमान वर्ष में अपनी श्रेणी के टॉप 20% में बने हुए हों। इसका उद्देश्य है कि ये शहर स्वच्छता के उच्चतम मानकों की ओर और मजबूती से आगे बढ़ें, साथ ही अन्य शहरों को प्रेरणा दें।













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