पटना : बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी एनडीए के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारेगी। यह फैसला राज्यसभा की पांचवीं सीट पर महागठबंधन की संभावनाओं को लेकर आया है।
बिहार विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन‑समर्थक दलों के पास कुल 35 विधायक हैं। हर राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोट आवश्यक हैं। इसलिए चार सीटों पर NDA की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है।
तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और महागठबंधन इस चुनाव में मजबूती से हिस्सा ले रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला कुछ ही दिनों में किया जाएगा।
महागठबंधन के लिए पांचवीं सीट जीतना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उसे इसके लिए अतिरिक्त 6 वोटों की जरूरत होगी। इसी कारण से तेजस्वी यादव की नजर छोटे सहयोगी दलों पर है, जैसे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायकों पर। AIMIM ने अपने उम्मीदवार को उतारने की बात कही है और विपक्षी खेमे से समर्थन की संभावना तलाश रही है।
राज्यसभा चुनाव में जब किसी गठबंधन के अलावा दूसरा उम्मीदवार भी मैदान में होगा, तो विधानसभा मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हालात में परिणाम पूरी तरह से निश्चित नहीं कहे जा सकते।
नामांकन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और अंतिम तारीख 5 मार्च निर्धारित की गई है। मतदान और परिणाम की घोषणा 16 मार्च को होगी।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पांचवीं सीट पर सियासी लड़ाई न केवल महागठबंधन और NDA के बीच होगी, बल्कि छोटे दलों और क्रॉस वोटिंग के कारण चुनाव परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित भी हो सकते हैं।













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