नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यह पूरी तरह से अतार्किक लगता है कि टेलीफोन के एक तार से 11 केवी बिजली प्रवाहित हुई और इसके संपर्क में आने पर तार पिघला तक नहीं। कोर्ट ने लापरवाही बरतने के कारण हुई मौत के मामले में दो लोगों की दोषसिद्धि को निरस्त करते हुए यह कहा। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामले में जल्दबाजी में निष्कर्षों पर पहुंचने का खतरा होता है।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फरवरी 2017 के फैसले के खिलाफ दोनों याचिकाकर्ताओं की अपील को स्वीकार कर लिया। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले की पुष्टि की थी, जिसमें दोनों याचिकाकर्ताओं को दोषी करार दिया गया था और एक साल तथा तीन महीने की सजा सुनाई गई थी। यह घटना नवंबर 2003 में हुई थी, जब अपने घर में टेलीविजन देख रहे एक व्यक्ति ने टीवी पर अचानक एक आवाज सुनी।
खंभे पर काम करते समय टेलीफोन का तार खींच दिया
जब वह आपस में जुड़े तारों को छुड़ाने के लिए उठा, तब उसे बिजली का झटका लगा और करंट लगने से उसकी मौत हो गई। जांच के दौरान यह पाया गया है कि एक याचिकाकर्ता, जो टेलीफोन विभाग के एक कर्मचारी (दूसरे याचिकाकर्ता) की निगरानी में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करता है, ने खंभे पर काम करते समय टेलीफोन का तार खींच दिया।
क्या है आरोप?
बताया जाता है कि टेलीफोन का तार उखड़ गया और 11 केवी लाइन पर गिर गया। टेलीफोन के तार से होकर बिजली का प्रवाह हुआ जिसके चलते यह घटना हुई। यह आरोप है कि घटना याचिकाकर्ताओं के लापरवाही बरतने के चलते हुई।













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