महाराष्ट्र में रविवार को हुए सियासी ड्रामे में एनसीपी नेता अजित पवार ने शिंदे सरकार में डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। अजित पवार के इस कदम को एनसीपी मुखिया शरद पवार ने धोखा बताया। जब शरद पवार अपने भतीजे के इस कदम को धोखा बता रहे थे तो साल 1978 की एक घटना याद आ रही थी। यह घटना महाराष्ट्र की सियासत में ही हुई थी और इसके मुख्य किरदार थे शरद पवार। दिलचस्प बात यह है कि तब शरद पवार को धोखेबाज कहा गया था। आखिर क्या थी महाराष्ट्र की राजनीति में 1978 में घटी वह घटना…
यह था मामला
साल 1978 में शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे। तब उनकी उम्र मात्र 38 साल थी। मुख्यमंत्री का यह पद हासिल करने के लिए शरद पवार ने जबर्दस्त ढंग से तोड़फोड़ की थी। असल में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की हालत पतली थी। कांग्रेस के दो गुट बन चुके थे। इनमें से एक था रेड्डी कांग्रेस, जिसे शंकरराव चव्हाण और ब्रह्मानंद रेड्डी ने मिलकर बनाया था। शरद पवार भी इसी पार्टी का हिस्सा थे। दूसरी तरफ थी इंदिरा कांग्रेस जिसमें नाशिकराव तिरपुडे जैसे नेता थे। 1978 में जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए तो दोनों गुटों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इसमें रेड्डी कांग्रेस को 69 और इंदिरा कांग्रेस के 62 सीटें मिली थीं, जबकि 99 सीटों के साथ जनता पार्टी सबसे आगे थी।
ऐसे बनाई थी सरकार
जनता पार्टी को रोकने के लिए कांग्रेस नेताओं ने योजना बनाई और दिल्ली पहुंच गए। यहां पीएम इंदिरा गांधी की सहमति से रेड्डी कांग्रेस और इंदिरा कांग्रेस की सरकार बनाने पर बात बनी। नई सरकार ने 7 मार्च 1978 को शपथ ली और वसंतदादा पाटिल सीएम बने। सरकार बन तो गई, लेकिन इंदिरा कांग्रेस के नाशिकराव, जो कि डिप्टी सीएम भी थे, लगातार अड़ंगेबाजी कर रहे थे। शरद पवार इस सरकार में उद्योग मंत्री थे और उन्हें नाशिकराव का रवैया बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। बाद में उन्होंने 40 विधायकों के साथ सरकार से अलग होने का फैसला किया और सुशील कुमार शिंदे समेत कई मंत्रियों के साथ चले गए। पवार के इस कदम से वसंतदादा पाटिल की सरकार अल्पमत में आ गई और चार महीने में ही सरकार गिर गई। सियासी जगत में पवार के इस कदम को वसंतदादा के लिए धोखा माना गया।
मात्र 18 महीने रहे सीएम
वसंतदादा पाटिल की सरकार से अलग होने के बाद शरद पवार ने समाजवादी कांग्रेस नाम से नई पार्टी बनाई। इसमें जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी और शेतकरी कामगार पक्ष को मिलाकर शरद पवार ने गठबंधन बनाया जिसका नाम रखा, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट। तब मात्र 38 साल की उम्र में सीएम पद की शपथ लेकर शरद पवार भारत के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि पवार की सरकार महज 18 महीने चल पाई थी। इंदिरा गांधी के दोबारा प्रधानमंत्री बनते ही शरद पवार की उलटी गिनती शुरू हो गई थी और 17 फरवरी 1980 को उनकी सरकार बर्खास्त कर दी गई।













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