वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता संपन्न हो गया है। इसके साथ ही विश्व व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने तथा क्षेत्र में लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया गया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश में कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूर्ण हो चुका है। उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करने की अनुमति प्रदान की। माना जा रहा है कि इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों पर सामान्य स्थिति बहाल होगी।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए गए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी पुष्टि की कि व्यापक वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है।
शरीफ़ के अनुसार, दोनों देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने वक्तव्य में शरीफ़ ने इस कूटनीतिक सफलता का स्वागत करते हुए मध्यस्थता में शामिल सभी पक्षों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से कतर, सऊदी अरब और तुर्किये के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने वार्ता को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि समझौते के क्रियान्वयन से पहले मध्यस्थों की देखरेख में कई बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में तकनीकी विषयों पर चर्चा कर औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि लेबनान में हालिया सैन्य घटनाओं के बावजूद समझौता प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। अमेरिकी समाचार पोर्टल एक्सियोस से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि बेरूत में हुए इज़रायली हमले के कारण समझौते पर हस्ताक्षर कुछ घंटों के लिए टल गए थे।
ट्रंप ने हमले के समय को लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इससे चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और ईरान समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी में थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। उनके अनुसार, इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अधिक प्रभावी निगरानी सुनिश्चित होगी तथा परमाणु सामग्री के निरीक्षण और प्रबंधन के लिए सख्त व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
हालांकि ट्रंप और शहबाज़ शरीफ़ दोनों ने समझौते की घोषणा कर दी है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक ईरान की ओर से इसकी आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई थी।
यदि यह समझौता निर्धारित रूप से लागू होता है, तो इसे पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। इससे क्षेत्र में कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के समाप्त होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।












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