डेस्क: मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के बीच सोने की कीमतों में वैश्विक स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है। यह तब हुआ जब मिडिल ईस्ट में युद्ध अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इसका असर सिर्फ दुनिया भर पर नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर भी महसूस किया जा रहा है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव 107.21 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 106.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से दुनिया के एक-पांचवें तेल का आवागमन होता है, क्षेत्रीय तनाव के चलते बाधित हो रहा है।
सिंगापुर में सुबह 6:56 बजे स्पॉट गोल्ड 0.9% गिरकर 5,124.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 1.6% गिरकर 83.22 डॉलर प्रति औंस रही। प्लैटिनम 3% से अधिक टूटा और पैलेडियम 0.9% लुढ़क गया। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में 0.4% की तेजी आई।
वैश्विक कारक और सोने पर दबाव
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिका में महंगाई की आशंका को बढ़ा दिया है। इससे यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें यथावत रख सकता है या बढ़ा भी सकता है। आमतौर पर, उच्च ब्याज दर और मजबूत डॉलर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक संकेत माने जाते हैं।
भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देख रहे हैं। इस साल सोने ने अब तक लगभग 20% का रिटर्न दिया है। वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में अनिश्चितताएँ और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंता, सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग को बनाए रखती है।
मिडिल ईस्ट युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट का युद्ध अब अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है। तेहरान ने हाल ही में नया सर्वोच्च नेता चुना और फारस की खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी रखे। वहीं, इजराइल ने ईरान की राजधानी में ईंधन डिपो पर हमला किया और पावर ग्रिड को निशाना बनाने की चेतावनी दी। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत पर प्रभाव
भारत, एक प्रमुख तेल आयातक देश होने के नाते, बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों से सीधे प्रभावित हो रहा है। कच्चे तेल की महंगाई घरेलू ईंधन दरों को बढ़ाती है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। मजबूत डॉलर का असर रुपए पर भी पड़ता है, जिससे आयात महंगे हो जाते हैं और सोने की कीमतों पर भी असर पड़ता है।
भारतीय निवेशकों के लिए सोना सुरक्षित निवेश बना हुआ है, लेकिन बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरें और मजबूत डॉलर अल्पकालिक लाभ को सीमित कर सकते हैं।
संक्षेप में, वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक नीतियां न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि भारत की मुद्रा, महंगाई और निवेश पर भी सीधा असर डाल रही हैं।













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