हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भगवान विष्णु की आराधना का पावन मार्ग माना जाता है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाला व्रत माना गया है।
वरुथिनी एकादशी २०२६ की तिथि और शुभ समय
वर्ष २०२६ में वरुथिनी एकादशी का व्रत १३ अप्रैल २०२६ (सोमवार) को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि का आरंभ १३ अप्रैल की प्रातः काल से होकर १४ अप्रैल तक रहेगा।
पारण (व्रत तोड़ने का समय)
१४ अप्रैल २०२६ की प्रातःकाल, सूर्योदय के बाद शुभ समय में व्रत का पारण किया जाएगा।
वरुथिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
वरुथिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार से जोड़ा जाता है। यह व्रत:
- पूर्व जन्मों के पापों का नाश करता है
- जीवन में सुख, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करता है
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है
शास्त्रों के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से साधक भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होता है।
पूजा विधि
वरुथिनी एकादशी पर श्रद्धालु प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर निम्न विधि से पूजा करते हैं:
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करें
- व्रत का संकल्प लें
- तुलसी पत्र सहित भगवान विष्णु की पूजा करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- दिनभर उपवास रखकर भजन-कीर्तन और ध्यान करें
- रात्रि में जागरण का विशेष महत्व है
व्रत के नियम
इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है:
- अनाज, दाल और तामसिक भोजन का त्याग
- क्रोध, झगड़ा और नकारात्मक विचारों से दूरी
- सत्य और संयम का पालन
- दान और पुण्य कर्म का महत्व
पारण का महत्व
एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में सही समय पर पारण करके किया जाता है। पारण के समय शुद्ध भोजन और तुलसी जल का प्रयोग शुभ माना गया है। सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक संदेश
वरुथिनी एकादशी केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का अवसर है। यह दिन हमें सिखाता है कि संयम, श्रद्धा और भक्ति से जीवन में अंधकार को दूर कर प्रकाश प्राप्त किया जा सकता है।
निष्कर्ष
वरुथिनी एकादशी २०२६ भक्तों के लिए एक दिव्य अवसर है, जब वे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध कर सकते हैं। यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति देता है, बल्कि जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।













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