जापान के हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के पास स्थित प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पापुआ न्यू गिनी पहुंचे, जहां के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और पीएम मोदी के पैर भी छुए। पीएम मोदी के लिए पापुआ न्यू गिनी ने अपने पारंपरिक प्रोटोकॉल भी तोड़ दिया और रात में उनकी अगवानी की। यहां की परंपरा रही है कि यह देश किसी भी विदेशी मेहमान का राजकीय सम्मान के साथ स्वागत रात और अगवानी रात में नहीं करता।
1975 में ऑस्ट्रेलिया से आजाद होने के बाद से ही पापुआ न्यू गिनी और भारत के बीच राजनयिक संबंध रहे हैं। 1996 में ही पापुआ न्यू गिनी की राजधानी पोर्ट मोरेस्बी में भारतीय मिशन की स्थापना की गई थी। हालांकि, इसके 10 साल बाद यानी 2006 में PNG ने अपना रेजिडेंट मिशन नई दिल्ली में खोला। दोनों देश कॉमनवेल्थ कंट्री के साझेदार हैं और दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश कॉमनवेल्थ, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और संयुक्त राष्ट्र जैसे अधिकांश वैश्विक मंचों पर विचारों की समानता साझा करते रहे हैं और मिलकर काम करते रहे हैं।
पापुआ न्यू गिनी के लिए भारत इतना अहम क्यों?
पापुआ न्यू गिनी ने ‘द ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहु’ से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किया है। कोरोना काल में जब पश्चिमी देशों ने पापुआ न्यू गुनी जैसे छोटे और दक्षिणी देशों को कोविड वैक्सीन देने से मना कर दिया था, तब भारत ने पापुआ न्यू गिनी समेत कई अफ्रीकी और द्वीपीय देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। इसलिए पापुआ न्यू गिनी, फिजी जैसे देश भारत को बहुत महत्व देते हैं और भारत के साथ राजनियक संबंधों को मजबूत करने के लिए तत्पर रहते हैं। फिजी ने भी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया है।
भारत से PNG को क्या मिलेगा?
पापुआ न्यू गिनी (PNG) में पीएम मोदी ने FIPIC के तीसरे सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने हिंद-प्रशांत के देशों के लिए 12 सूत्रीय एक्शन प्लान का भी एलान किया। भारत पापुआ न्यू गिनी को आईटी और साइबर सिक्योरिटी का हब बनाएगा। इसके अलावा छोटे और मझौले उद्योगों को स्थापित करने में मदद करेगा। भारत ने ऐलान किया है कि सागर अमृत स्कॉलरशिप के तहत अगले पांच साल में 1000 छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी।
पापुआ न्यू गिनी इतना अहम क्यों?
पापुआ न्यू गिनी ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से अहम देश है। यह दुनिया का सबसे बड़ा द्विपीय देश है। इसका आकार जापान से भी बड़ा है। यहां द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भीषण लड़ाइयां हुई थीं। करीब एक करोड़ की आबादी वाला यह देश सर्वाधिक जनसंख्या वाला हिंद-प्रशांत इलाके का देश है। चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत यहां अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है। इस देश में कॉपर और गोल्ड का प्रचूर भंडार भी है। चीन की नजर सामरिक स्थिति के अलावा पापुआ न्यू गिनी के खनिज भंडार पर भी है।
हिंद-प्रशांत इलाके में चीन का दबदबा रहा है। व्यापार और निवेश के बल पर चीन इस इलाके में अपनी पैठ और दादागिरी दिखाता रहा है। इसलिए चीन पर अंकुश लगाने के लिए क्वाड के दूसरे देशों अमेरिका और आस्ट्रेलिया ने भारत के साथ मिलकर यहां काम करने की योजना बनाई है। इस योजना को साकार करने में पापुआ न्यू गिनी कूटनीति का एक नया केंद्र बन सकता है। इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पापुआ न्यू गिनी का दौरा किया है। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी यहां पहले जा चुके थे।
अमेरिका ने भी पापुआ न्यू गिनी के साथ किया नया सुरक्षा समझौता:
हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की चीन की कोशिशों के बीच अमेरिका ने पापुआ न्यू गिनी के साथ एक नया सुरक्षा समझौता किया है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नया समझौता सुरक्षा सहयोग में सुधार करने, पापुआ न्यू गिनी के रक्षा बल की क्षमता और क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने में मदद करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करेगा। विभाग ने कहा कि इस समझौते को कुछ महीनों के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पत्रकारों से कहा,“भविष्य को आकार देने की कोशिश के लिए हम जो काम एक साथ कर रहे हैं, वह इससे अधिक अहम नहीं हो सकता, इससे अधिक सामयिक नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा, “हम हिंद प्रशांत में गहराई से जुड़े हुए हैं, क्योंकि हमारी पृथ्वी का भविष्य यहां लिखा जा रहा है। पापुआ न्यू गिनी उस भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है।” पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने कहा कि यह समझौता पारस्परिक रूप से लाभकारी है और दुनिया के इस हिस्से में मजबूत अर्थव्यवस्था बनने में हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है। हालांकि, इस समझौते के खिलाफ देश के दूसरे सबसे बड़े शहर ले में छात्रों ने प्रदर्शन किए। इसके अलावा प्रशांत क्षेत्र में कई लोग इस क्षेत्र के बढ़ते सैन्यीकरण को लेकर चिंतित हैं।
सोलोमन द्वीप पर चीन का दबदबा:
पिछले साल सोलोमन आइलैंड्स ने चीन के साथ सुरक्षा समझौता किया था। इस कदम से पूरे प्रशांत क्षेत्र में चिंता व्यक्त की गई थी। अमेरिका ने प्रशांत क्षेत्र में अपनी तवज्जो बढ़ा दी है और सोलोमन आइलैंड्स और टोंगा में दूतावास खोले हैं। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पापुआ न्यू गिनी की अपनी यात्रा रद्द कर दी थी। अगर वह यात्रा पर आते तो यहां आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति होते। उनके स्थान पर विदेश मंत्री ब्लिंकन सोमवार को यहां पहुंचे। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे वक्त हुई है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पापुआ न्यू गिनी आए थे। यानी भारत-अमेरिका मिलकर पापुआ न्यू गिनी से हिन्द-प्रशांत इलाके में कूटनीति की नई कहानी लिख रहे हैं।













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