डेस्क : ईरान को लेकर पश्चिमी देशों में बढ़ते तनाव के बीच नाटो गठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी क्रम में अमेरिका ने जर्मनी में तैनात अपने लगभग 5000 सैनिकों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने यह फैसला नाटो सहयोगियों के साथ रणनीतिक मतभेद और यूरोप में बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए लिया है। जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में यह पहली बड़ी कटौती मानी जा रही है।
ईरान संकट बना तनाव की वजह
जानकारी के अनुसार, ईरान को लेकर पश्चिमी देशों की रणनीति में एकरूपता नहीं बन पा रही है। अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक दबाव को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इसी पृष्ठभूमि में नाटो देशों के बीच समन्वय कमजोर होता दिखाई दे रहा है।
जर्मनी से चरणबद्ध वापसी
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, यह वापसी अचानक नहीं होगी बल्कि चरणबद्ध तरीके से अगले कई महीनों में पूरी की जाएगी। इसमें एक प्रमुख सैन्य ब्रिगेड और कुछ सहायक इकाइयाँ शामिल हैं। वर्तमान में जर्मनी में लगभग 35 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
नाटो की एकता पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल सैन्य पुनर्संरचना नहीं है, बल्कि नाटो के भीतर बढ़ती राजनीतिक दूरी का संकेत भी है। यूरोपीय देशों की अलग-अलग प्राथमिकताओं और अमेरिका की बदलती वैश्विक रणनीति के कारण गठबंधन की एकता पर दबाव बढ़ रहा है।
वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव
इस फैसले के बाद यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे रूस और अन्य वैश्विक शक्तियों को क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। वहीं, अमेरिका का कहना है कि यह कदम उसकी वैश्विक सैन्य रणनीति के पुनर्संतुलन का हिस्सा है।













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