डेस्क : देश में चुनावी माहौल के बीच एग्जिट पोल को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत और भूपेश बघेल ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इन्हें “भ्रम पैदा करने वाला” करार दिया है।
अशोक गहलोत ने कहा कि एग्जिट पोल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अंतिम सच नहीं होते। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार ये आंकड़े जनमत को प्रभावित करने के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि वास्तविक जनादेश मतगणना के बाद ही सामने आता है। गहलोत ने कहा कि पिछले चुनावों में भी एग्जिट पोल कई बार पूरी तरह गलत साबित हुए हैं।
वहीं भूपेश बघेल ने भी एग्जिट पोल को लेकर संदेह जताते हुए कहा कि अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे में भारी अंतर साफ दिखता है, जिससे इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और जनता को इन अनुमानों के बजाय आधिकारिक परिणामों पर ही भरोसा करना चाहिए।
दरअसल, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में मतदान के बाद जारी एग्जिट पोल में परस्पर विरोधी तस्वीर सामने आई है। कहीं स्पष्ट बहुमत का दावा किया गया है तो कहीं त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई गई है, जिससे सियासी बहस और तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एग्जिट पोल को लेकर यह विवाद नया नहीं है, लेकिन हर चुनाव में इसके बहाने राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के तहत माहौल बनाने की कोशिश करते हैं।
इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर गहलोत ने श्रमिकों के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि देश के कई हिस्सों में मजदूरों को न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है, जो सरकारों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
कुल मिलाकर, एग्जिट पोल को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और अब सभी की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब असली तस्वीर साफ होगी।













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