डेस्क : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। पश्चिम बंगाल से जुड़े एक कार्यक्रम या राजनीतिक संदर्भ में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यदि किसी को उर्दू सीखने या बोलने की इतनी ही इच्छा है, तो वह उन क्षेत्रों में जाए जहाँ उर्दू मुख्य रूप से बोली जाती है।
इस टिप्पणी के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह के बयान देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता के खिलाफ हैं और इससे समाज में विभाजन की भावना बढ़ सकती है।
वहीं, सत्तापक्ष की ओर से इस बयान का बचाव करते हुए कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य किसी भाषा का विरोध करना नहीं है, बल्कि शिक्षा और प्रशासन में क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की बात करना है।
योगी आदित्यनाथ पहले भी भाषा, संस्कृति और शिक्षा को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। उनके बयानों पर अक्सर राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाता है और विपक्ष उन्हें घेरता रहा है।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

