डेस्क : नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर देश की राजनीति तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और इस पूरे प्रकरण पर भारतीय जनता पार्टी को देश के सामने उत्तर देना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए कठोर कानून और सख्त कार्रवाई के बड़े दावे किए थे, किंतु देश की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सकीय प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाना सरकार की विफलता को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं और परिवार अपनी जीवनभर की पूंजी बच्चों की पढ़ाई तथा प्रशिक्षण पर व्यय करते हैं, लेकिन प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और सपनों को नष्ट कर देती हैं। ओवैसी ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।
चिकित्सा प्रवेश परीक्षा निरस्त किए जाने के बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर आक्रमण कर रहे हैं। कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि बार-बार होने वाली प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हैं और सरकार परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल सिद्ध हुई है।
उधर, राष्ट्रीय परीक्षा अभिकरण ने स्पष्ट किया है कि निरस्त की गई परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को पुनः आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पूर्व पंजीकरण तथा परीक्षा संबंधी विवरण आगामी परीक्षा के लिए मान्य रहेंगे।
इस बीच जांच एजेंसियां प्रश्नपत्र लीक गिरोह की तह तक पहुंचने में जुटी हुई हैं। प्रारंभिक जांच में अनेक राज्यों तक फैले संगठित तंत्र की आशंका व्यक्त की जा रही है। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी और अधिक तेज हो गई है।











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