डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी हलचल के बीच एक नया गठजोड़ सामने आया है। असदुद्दीन ओवैसी ने मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के साथ साझा मंच पर आकर राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य में मुसलमानों को लंबे समय से केवल “वोटिंग मशीन” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका आरोप था कि दशकों से विभिन्न राजनीतिक दलों—कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस—को समर्थन देने के बावजूद समुदाय के सामाजिक और आर्थिक हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी कहा कि किसी भी समुदाय की वास्तविक भागीदारी तभी संभव है जब उसका अपना राजनीतिक नेतृत्व मजबूत हो। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे ऐसे प्रतिनिधियों को चुनें जो सीधे उनके मुद्दों को उठाएं और जवाबदेह हों।
यह रैली ओवैसी और हुमायूं कबीर के बीच उभरते राजनीतिक तालमेल का संकेत मानी जा रही है। माना जा रहा है कि यह गठजोड़ विशेष रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस नए समीकरण से राज्य में बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जिससे सत्तारूढ़ दल के सामने नई चुनौतियां खड़ी होने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह गठबंधन जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव डाल पाता है।













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