डेस्क : आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लोकप्रिय अभिनेता पवन कल्याण ने अपने जीवन के एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाले दौर का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में वे नक्सल आंदोलन की ओर आकर्षित हो गए थे और यहां तक कि हथियार उठाने की भावना भी उनके भीतर पैदा हो चुकी थी। लेकिन उनके बड़े भाई और मेगास्टार चिरंजीवी ने समय रहते उन्हें सही दिशा दिखाई और इस रास्ते पर आगे बढ़ने से रोक लिया।
एक हालिया पॉडकास्ट बातचीत में पवन कल्याण ने बताया कि उस समय दुनिया में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों का उन पर गहरा असर पड़ रहा था। दक्षिण अफ्रीका का रंगभेद आंदोलन, श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) की गतिविधियां, शीत युद्ध के बाद की वैश्विक उथल-पुथल और भारत सहित कई देशों में असंतोष की स्थितियों ने उनके भीतर गुस्सा और बेचैनी पैदा कर दी थी।
पवन कल्याण ने स्वीकार किया कि लगभग 17 से 21 वर्ष की उम्र के बीच वे नक्सल विचारधारा की ओर झुकाव महसूस करते थे और उस दौर में उन्होंने कुछ जनसभाओं में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें लगता था कि समाज में फैली असमानता और अन्याय के खिलाफ सबसे कठोर कदम उठाना जरूरी है, यहां तक कि हथियार उठाना भी एक विकल्प लगने लगा था।
इसी दौरान उनके बड़े भाई चिरंजीवी ने उनकी मानसिक स्थिति को समझा और हस्तक्षेप किया। पवन कल्याण के अनुसार, चिरंजीवी ने उनसे सवाल किया कि उनके भीतर यह “आक्रोश और क्रोध” किस दिशा में जा रहा है और उन्हें समझाया कि बदलाव का रास्ता हिंसा नहीं, बल्कि रचनात्मक कार्य और सामाजिक योगदान है। इसी मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
पवन कल्याण ने यह भी कहा कि अगर उस समय चिरंजीवी का समर्थन और समझदारी न होती, तो उनका जीवन पूरी तरह अलग दिशा में जा सकता था। बाद में उन्होंने अभिनय को अपनाया और फिर राजनीति में सक्रिय होकर समाज सेवा के एक अलग रास्ते पर आगे बढ़े।
उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे एक निर्णायक पारिवारिक हस्तक्षेप किसी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकता है।













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