वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को लेकर एक नई कांग्रेस रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें अमेरिकी वायुसेना को भारी नुकसान होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान के दौरान कुल 42 सैन्य विमानों को या तो पूरी तरह खो दिया गया या उन्हें गंभीर क्षति पहुंची है।
कांग्रेस की इस मूल्यांकन रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़ा विभिन्न सैन्य स्रोतों, पेंटागन के प्रारंभिक आकलनों और सेंटकॉम (मध्य कमान) से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि, इसे अंतिम और पूर्ण रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं माना जा रहा है, क्योंकि कई मामलों में विस्तृत ऑडिट अभी जारी है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि नुकसान का दायरा केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें टैंकर विमान, निगरानी विमान और मानवरहित ड्रोन भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एफ-15ई, एफ-35ए जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान, केसी-135 और केसी-46 श्रेणी के ईंधन भरने वाले विमान, ई-3 एडब्ल्यूएसीएस जैसे निगरानी प्लेटफॉर्म और एमक्यू-9 रीपर जैसे ड्रोन इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन आंकड़ों की पुष्टि होती है तो यह अमेरिका के लिए एक अत्यंत महंगा सैन्य अभियान साबित हो सकता है। कुछ आकलनों में यह भी कहा गया है कि इन विमानों के नुकसान की कुल लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है, जिसमें प्रतिस्थापन और तकनीकी पुनर्निर्माण की लागत शामिल है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से अब तक इस पूरे आंकड़े पर कोई अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र से आने वाले प्रारंभिक आंकड़े अक्सर संशोधित किए जाते हैं और वास्तविक नुकसान का अंतिम विवरण बाद में स्पष्ट होता है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी सैन्य रणनीति और इस अभियान की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर हवाई संसाधनों को नुकसान पहुंचा है, तो यह आधुनिक युद्ध रणनीति और हवाई सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।













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