वृंदावन: आदरणीय महामंडलेश्वर स्वामी श्याम चेतन पुरी जी के मार्गदर्शन में जन्माष्टमी के पावन पर्व पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वामी जी ने देश और विदेश से आए अपने अनुयायियों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस उत्सव की आध्यात्मिक महत्व को समझाया।
स्वामी श्याम चेतन पुरी जी ने अपने संदेश में कहा कि जन्माष्टमी हमें धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सभी अनुयायियों से अनुरोध किया कि वे हर वर्ष कम से कम एक बार भगवद गीता का पाठ अवश्य करें। उनका कहना था कि गीता के उपदेश हमें जीवन में धर्म और न्याय के सिद्धांतों को अपनाने में मदद करते हैं और हमें सही मार्ग पर चलने तथा जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
स्वामी जी ने गीता के संदेशों की महत्ता को उजागर करते हुए बताया कि ये उपदेश हमें आत्मिक शांति और दृढ़ता प्रदान करते हैं, जिससे हम जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से गीता के शिक्षाओं के माध्यम से नैतिक और धार्मिक जीवन जीने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में, महामंडलेश्वर स्वामी श्याम चेतन पुरी जी ने सभी उपस्थित लोगों को श्री कृष्ण की कृपा और आशीर्वाद की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। इस प्रकार, जन्माष्टमी का यह आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा था, जिसने सभी को धर्म और नैतिकता की ओर मार्गदर्शन प्रदान किया।













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