स्पोर्ट्स डेस्क : एशियन गेम्स 2023 के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय कंपाउंड तीरंदाज प्रतिमेश जावकर पर एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के चलते दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले के बाद वह अप्रैल 2028 तक किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
ओलंपिक्स डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, 22 वर्षीय जावकर ने अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (आईटीए) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को स्वीकार कर लिया है। यह प्रतिबंध 19 अप्रैल से प्रभावी हो गया है।
जावकर पर यह कार्रवाई एंटी-डोपिंग नियमों के तहत “व्हेयरअबाउट्स फेल्योर” यानी ठिकाने की जानकारी समय पर अपडेट न करने के कारण हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी, जुलाई और अक्टूबर में तीन बार उन्होंने अपने लोकेशन की जानकारी दर्ज करने में विफलता की, जो 12 महीने की अवधि में नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
एंटी-डोपिंग नियमों के तहत रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (आरटीपी) में शामिल खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम (एडीएएमएस) पर अपनी लोकेशन नियमित रूप से अपडेट करनी होती है, ताकि कभी भी बिना पूर्व सूचना के परीक्षण किया जा सके।
प्रतिबंध स्वीकार करते हुए जावकर ने कहा कि उन्होंने कानूनी सलाह के बाद इस मामले को चुनौती न देने का निर्णय लिया। उन्होंने माना कि यह लापरवाही “पूरी तरह से उनकी गलती” थी। उनके अनुसार, कुछ समय सीमा चूकने, फोन नोटिफिकेशन बंद रहने और विदेश यात्रा के दौरान कार्यक्रम को लेकर असमंजस के कारण यह स्थिति बनी।
प्रतिबंध के बावजूद जावकर ने अभ्यास जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा, “जो हो गया, वह हो गया। मैं अभ्यास नहीं छोड़ूंगा और उम्मीद नहीं खोऊंगा।”
गौरतलब है कि प्रतिमेश जावकर भारत की उस स्वर्ण पदक विजेता पुरुष कंपाउंड टीम का हिस्सा थे, जिसने हांगझोऊ एशियन गेम्स में ओजस प्रवीण देवताले और अभिषेक वर्मा के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता था।
वर्ष 2023 में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने शंघाई में वर्ल्ड कप स्टेज में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
यह प्रतिबंध उनके उभरते हुए करियर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब वह 18 अप्रैल 2028 के बाद ही प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी कर सकेंगे।













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