इस बार पितृपक्ष की शुरुआत एक अद्भुत खगोलीय घटना, चंद्रग्रहण, के साथ हो रही है। यह चंद्रग्रहण खास इसलिए है क्योंकि यह सुपरमून भी होगा। सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे वह सामान्य से ज्यादा चमकदार और बड़ा दिखाई देता है। इस विशेष चंद्रग्रहण को सुपर हारवेस्ट मून के नाम से भी जाना जा रहा है। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका तर्पण और पितृ पक्ष से जुड़े किसी भी धार्मिक कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब कोई ग्रहण किसी देश में नहीं दिखाई देता, तो उसका उस देश के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों पर कोई प्रभाव नहीं माना जाता है।
चंद्रग्रहण के सूतक की अवधि ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होती है, लेकिन 18 सितंबर को होने वाले इस चंद्रग्रहण का सूतक भारत में नहीं लगेगा, क्योंकि यह यहां दिखाई नहीं देगा। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इस बार का पितृपक्ष कई राशियों के लिए सौभाग्य लेकर आया है। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, विशेष रूप से तीन राशियों के लिए यह समय बेहद लाभकारी साबित होगा।
इस चंद्रग्रहण का प्रभाव मीन राशि में पड़ेगा, जो मेष, कर्क और मिथुन राशि के जातकों के लिए अत्यधिक शुभ साबित हो सकता है। इन तीन राशियों के लोगों को व्यापार और नौकरी में विशेष लाभ मिलने की संभावना है। ज्योतिषाचार्य स्वामी रंगनाथाचार्य ने बताया कि इस दौरान मेष, कर्क और मिथुन राशि के लोगों को आर्थिक और व्यावसायिक क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही, अन्य राशियों पर भी इस ग्रहण का कुछ न कुछ असर रहेगा, लेकिन विशेष लाभ इन तीन राशियों को मिलने की संभावना अधिक है।
इस दिन एक और खगोलीय घटना होने वाली है। शुक्र ग्रह कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश कर रहा है, जिससे भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
चंद्रग्रहण कब और कैसे लगता है?
चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस प्रकार आ जाती है कि सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। यह घटना पूर्णिमा की रात होती है, जब चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी और सूर्य के साथ एक सीध में होती है। इस दौरान चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, जिससे चंद्रग्रहण होता है।
चंद्रग्रहण के तीन प्रकार होते हैं:
- उपच्छाया चंद्रग्रहण: इसमें चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया से गुजरता है, जिससे उसकी चमक थोड़ी कम हो जाती है।
- आंशिक चंद्रग्रहण: इसमें चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में होता है।
- पूर्ण चंद्रग्रहण: इसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में ढक जाता है और उसका रंग हल्का लाल या तांबे जैसा हो जाता है।
इस प्रकार के खगोलीय घटनाओं का लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है, खासकर जब वे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जुड़े हों।













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