नांगलोई:अपने पावन संदेशों से जन मानस में नैतिकता व सदाचार की प्रेरणा प्रदान करने वाले शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का आज दिल्ली महानगर परिभ्रमण के अंतर्गत मंगलवार को नांगलोई में पावन पदार्पण हुआ। 6 मार्च को दिल्ली पधारे राज्य के राजकीय
अतिथि आचार्यश्री का दिल्ली प्रवास अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक रहा। स्वल्पकालिक प्रवास में भी करुणावत्सल आचार्यश्री ने कई क्षेत्रों का स्पर्श कर दिल्लीवासियों को अपनी कृपा से धन्य कर दिया। आज प्रातः कीर्तिनगर स्थित सुराणा निवास से पूज्यप्रवर ने मंगल विहार किया। स्थान-स्थान पर दर्शनार्थ उपस्थित श्रद्धालुओं पर आशीषवृष्टि करते हुए पूज्य आचार्यश्री दिल्ली सरकार द्वारा संचालित ‘आचार्य भिक्षु हॉस्पिटल’ में पधारे। स्थानीय विधायक एवं हॉस्पिटल के अध्यक्ष श्री शिवचरण गोयल ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। तत्पश्चात आचार्यश्री पश्चिम विहार स्थित तेरापंथ भवन में पधारे एवं उपस्थित श्रावक समाज को पथदर्शन प्रदान किया। लगभग दस किलोमीटर का विहार कर शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी नांगलोई स्थित एस.एस.जैन स्थानक में पधारे। इस दौरान श्रमणसंघ के श्री अमरमुनि एवं दिनेशमुनिजी ने अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी का भावभीना स्वागत किया। उपस्थित श्रावक समाज जैन धर्म की एकता के इस पावन क्षणों को देखकर आह्लाद की अनुभूति कर रहा था।
स्थानक परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान आचार्यश्री ने समुपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि समय सबको बराबर समान रूप से प्राप्त होता है। चाहे कोई राजनेता हो, अभिनेता, अधिनेता अथवा सामान्य आदमी हो, समय सबको बराबर ही मिलता है और वह समय आदमी को बिल्कुल मुफ्त प्राप्त होता है। आदमी कई बार मुफ्त में प्राप्त चीजों का मूल्यांकन कम करता है। आदमी को समय का मूल्यांकन करने का प्रयास करना चाहिए। इसके आदमी को अपने समय का प्रबन्धन करने का प्रयास करना चाहिए। हिंसा, चोरी, झूठ और पापाचार में अपना समय लगाने वाला आदमी अपने समय का दुरुपयोग करता है। धार्मिक कार्यों में, साधना, सेवा, सत्संगति और ध्यान में अपना समय लगाने वाला आदमी अपने समय का सदुपयोग करता है। इसलिए आदमी को अपने समय का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्यश्री ने अपने आगमन के संदर्भ में कहा कि 6 मार्च को दिल्ली पहुंचे थे और आज 29 मार्च है। आज दिल्ली का अंतिम प्रवास है। इस दौरान शासनमाता का महाप्रयाण भी हो गया और अब दिल्ली से बाहर की ओर विहार है। सब जगह खूब शांति रहे, समाज में धार्मिक आराधना का क्रम बराबर चलता रहे।
आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त कार्यक्रम में उपस्थित श्रमणसंघ के दिनेशमुनिजी ने भी श्रद्धालुओं को अभिप्रेरित किया। उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आचार्यश्री महाश्रमणजी से मिलकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। मुझे लम्बे समय से आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन की प्रतीक्षा थी, जो आज पूर्ण हो गई। आपका आगमन इस क्षेत्र के लोगों के लिए हितकारी बनेगा।
कार्यक्रम में अहिंसा यात्रा सम्पन्नता समारोह के अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा, मंत्री श्री डालमचंद बैद, श्री के.एल. जैन पटावरी, श्री ललित जैन, ईश्वर जैन, एस.एस. जैन सभा के श्री राजीव जैन, श्रीपाल जैन, श्री अमित जैन व जिया जैन ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल-नांगलोई ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
दिल्ली तेरापंथ समाज द्वारा दायित्व का हस्तांतरण
कार्यक्रम में तेरापंथ समाज दिल्ली द्वारा सरदारशहर तेरापंथ समाज को ध्वज हस्तांतरण कर यात्रा व्यवस्था की दायित्व सौंपा गया। अहिंसा यात्रा सम्पन्नता समारोह समिति के अध्यक्ष श्री महेन्द्र नाहटा ने अपने विचारों को प्रस्तुति दी। सरदारशहर श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक गीत का संगान किया। ज्ञातव्य है कि आगामी 25 अप्रैल 2022 से आचार्यश्री का सरदारशहर पदार्पण संभावित है। जहां पर ‘युगप्रधान अलंकरण’ समारोह, षष्ठीपूर्ति समारोह, अक्षय तृतीया समारोह आदि का आयोजन होगा।
सान्ध्यकालीन विहार के दौरान आचार्यश्री लगभग पांच किलोमीटर का विहार कर मुण्डका स्थित निगम प्रतिभा बालिका विद्यालय में पधारे। जहां आज का रात्रिकालीन प्रवास हुआ।













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