नई दिल्ली। दिल्ली में कार धमाका आतंकी हमला है या नहीं, इस पर अभी पुलिस या अन्य किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। यदि यह आतंकी हमला था तो एक बार फिर से पुलवामा में हुए अटैक की यादें ताजा हो गई हैं और इसका कनेक्शन सीधे तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ता है। यही नहीं एक बार फिर से VBIED की चर्चा होने लगी है, जिसके तहत आतंकी संगठन किसी गाड़ी में विस्फोटक भर कर हमला करने की रणनीति पर काम करते रहे हैं। ऐसे हमले दुनिया में कई जगहों पर होते रहे हैं, लेकिन भारत में पुलवामा आतंकी हमला इस तरह का बड़ा अटैक था। यदि दिल्ली में हुए धमाके में आतंकी ऐंगल निकलता है तो यह चिंता बढ़ाने वाला होगा और यह एक तरह पुलवामा मॉड्यूल होगा।
VBIED का अर्थ Vehicle-borne improvised explosive devices से है। इसके तहत आतंकी किसी वाहन में विस्फोटक लाद लेते हैं और टारगेट वाली जगह पर ले जाकर धमाका कर देते हैं। ऐसे हमलों में आतंकियों की पहचान करना या पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। विस्फोटक का जखीरा जमा करने या लेनदेन के दौरान ही यदि एजेंसियां पकड़ लेती हैं तो ठीक है वरना एक बार यदि आतंकी गाड़ी लेकर निकल जाए तो फिर चुनौती होता है। यदि यह आतंकी हमला था तो दिल्ली में भी ऐसी ही चुनौती आई होगी क्योंकि गाड़ी में कौन किस इरादे से सवार है या उसने क्या सामान रखा हुआ है। इसकी जांच करना बेहद मुश्किल और चुनौती भरा होता है।
दिल्ली में धमाका तब हुआ है, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों ने फरीदाबाद से एक टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। फरीदाबाद से 350 किलो विस्फोटक पकड़ा गया था। ऐसी ही कोशिश 2010 में हुई थी, जब दिल्ली की ही जामा मस्जिद के पास बम पाया गया था। उसमें इंडियन मुजाहिदीन शामिल था, जो पाकिस्तान प्रेरित है।
फिलहाल फरीदाबाद मॉड्यू में शामिल 8 लोगों को अरेस्ट किया गया है, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल हैं। इन लोगों के पास से बड़े पैमाने पर हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा भी मिला है। एजेंसियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पेशेवर लोग आमतौर पर समाज में सम्मानित होते हैं और उन्हें संदेह की नजर से नहीं देखा जाता। ऐसे में किसके पास विस्फोटक है और किसके पास नहीं है। ऐसा पता करना मुश्किल हो जाता है।













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