पुणे :राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को संबोधन के दौरान कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और इसी कारण दुनिया के नेता अब भारत की आवाज़ को गंभीरता से सुनते हैं। उनके अनुसार यह सम्मान भारत की बढ़ती शक्ति और विश्व के प्रति उसके योगदान की स्वीकार्यता का परिणाम है।
पुणे में संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि ऐसे अवसरों पर उत्सव से पहले कर्तव्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ का इतिहास चुनौतियों से भरा रहा है—तूफ़ानों का सामना करते हुए उसने 100 वर्ष पूरे किए हैं—लेकिन अब आत्मचिंतन का समय है कि समाज को एक करने में इतना लंबा समय क्यों लगा।
भारत के वैश्विक कद पर भागवत का जोर
भागवत ने कहा कि इतिहास में बार-बार यह सिद्ध हुआ है कि भारत के आगे बढ़ने से वैश्विक तनाव कम होते हैं और शांति स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात भारत से अधिक सक्रिय भूमिका की अपेक्षा कर रहे हैं और संघ के स्वयंसेवक इसी भावना के साथ कार्यरत हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री के भाषणों को विश्व के नेता इतनी गंभीरता से क्यों सुनते हैं? इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि “भारत की शक्ति अब उन स्थानों पर भी महसूस की जा रही है, जहां उसका सही मायनों में प्रकट होना आवश्यक था। दुनिया का ध्यान अब भारत की ओर केंद्रित है।”
‘हम देरी से नहीं आए’—भागवत का किस्सा
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने एक पुरानी टिप्पणी का ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था कि RSS 30 साल देर से आया है। भागवत ने मंच से जवाब साझा करते हुए कहा, “हम देर से नहीं आए, बल्कि आपने हमें देर से सुनना शुरू किया।”
उन्होंने कहा कि जब संघ संवाद या सामूहिक प्रयास की बात करता है, तो उसका अर्थ केवल संगठन नहीं बल्कि पूरे समाज से होता है। विविधता में एकता को भारत की मूल शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा सभी को साथ लेकर चलने से ही संभव है और इसके लिए धर्म और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
