डेस्क: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर के बीच होने जा रही है, जिसमें यह तय होगा कि ब्याज दरों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई दबाव कम होने के कारण आरबीआई बेंचमार्क लेंडिंग रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी, क्योंकि रेपो रेट घटने का सीधा असर लोन पर पड़ता है और ईएमआई कम हो जाती है। CPI आधारित खुदरा महंगाई पिछले दो महीनों से सरकार द्वारा तय निचली सीमा 2% से नीचे बनी हुई है। हालांकि दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जब देश की GDP ग्रोथ दूसरी तिमाही में 8.2% तक पहुँच चुकी है, ऐसे में आरबीआई संभवतः दरों को यथावत रखने का फैसला भी कर सकता है।
क्या है डिटेल
कई रिपोर्टों में अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। HDFC बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल स्थिति उलट रही है—ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा और महंगाई उम्मीद से कम। इसलिए दिसंबर की आरबीआई पॉलिसी पर फैसला कड़ा भी हो सकता है, लेकिन 25 bps कटौती की संभावना बनी हुई है। वहीं SBI रिसर्च का कहना है कि मजबूत GDP और कम महंगाई के बीच आरबीआई को अपनी आगे की रेट ट्रैजेक्टरी को स्पष्ट करना चाहिए। दूसरी ओर Bank of Baroda के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि फिलहाल नीतिगत दर में बदलाव की जरूरत नहीं है, क्योंकि आने वाले महीनों में महंगाई 4% से ऊपर रहने का अनुमान है।
क्रिसिल ने क्या कहा
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि हेडलाइन महंगाई घटने के पीछे मुख्य कारण खाद्य महंगाई का कम होना है, जबकि ईंधन की कीमतें भी स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने दिसंबर में 25 bps रेट कट की उम्मीद जताई है। वहीं ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि Q2 FY26 में GDP 8% से ऊपर रही है, इसलिए दिसंबर में रेट कट की संभावना कम दिखती है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आरबीआई का रुख न्यूट्रल से थोड़ा डोविश हो सकता है, जिससे बाजार को पर्याप्त लिक्विडिटी और भविष्य में कटौती की संभावना का संकेत मिल सकता है।
जानकारों की राय
कुछ उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अभी रेट कट का सही समय है। कृष्णा ग्रुप के चेयरमैन अशोक कपूर के अनुसार ऐतिहासिक रूप से कम महंगाई के दौर में आरबीआई के पास 25 bps कटौती का पूरा स्पेस है, जिससे हाउसिंग सेक्टर और समग्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं SBM बैंक के मंदार पितले का मानना है कि दिसंबर में आरबीआई संभवतः वर्तमान स्थिति बनाए रखेगा, ताकि ब्याज दरों में कमी के कारण विदेशी पूंजी प्रवाह पर नकारात्मक असर न पड़े और बैंकों की फंड जुटाने की क्षमता भी प्रभावित न हो।
अब बाजार की निगाहें 5 दिसंबर पर टिकी हैं, जब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा अंतिम फैसला सुनाएंगे।













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