नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशभर के नागरिकों को मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। ये पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में फसल कटाई के उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि ये त्योहार आशा, सकारात्मकता और नवचेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति देशभर में अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है, लेकिन हर जगह इसका उत्साह और उल्लास एक-सा रहता है। किसानों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व उन अन्नदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके परिश्रम से राष्ट्र का पोषण होता है।
माघ बिहू की शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने इसे असम की समृद्ध संस्कृति का प्रतिबिंब बताते हुए आनंद, सौहार्द और भाईचारे का पर्व कहा। उन्होंने कहा कि माघ बिहू फसल कटाई के मौसम के समापन का प्रतीक है और कृतज्ञता व संतोष की भावना को प्रोत्साहित करता है। प्रधानमंत्री ने किसानों के योगदान की सराहना करते हुए सभी के लिए शांति, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।
पोंगल के अवसर पर प्रधानमंत्री ने लोगों को “वनक्कम” कहते हुए शुभेच्छाएं दीं और कहा कि यह पर्व मानव और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पोंगल कृषि, ग्रामीण जीवन और श्रम की गरिमा का उत्सव है, जो परिवारों को जोड़ता है और सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है।
पोंगल को तमिल परंपराओं की समृद्धि का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक, तमिल भाषा की भूमि होने पर गर्व है।
असम का प्रमुख पर्व माघ बिहू माघ माह में फसल कटाई के समापन का प्रतीक है और इसे सामूहिक भोज के साथ मनाया जाता है। लोहरी, पोंगल, संक्रांति और उत्तरायण के साथ मिलकर ये पर्व भारत में फसल उत्सवों की विविध परंपराओं को दर्शाते हैं।
विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाई जाने वाली लोहरी अलाव, पारंपरिक व्यंजनों और लोकगीतों के साथ उत्साह और उमंग का संचार करती है।
प्रधानमंत्री आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में भी शामिल होंगे।













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