डेस्क : दिग्गज निवेश कंपनी टाइगर ग्लोबल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 में वॉलमार्ट–फ्लिपकार्ट अधिग्रहण डील के दौरान टाइगर ग्लोबल द्वारा फ्लिपकार्ट में 1.6 अरब डॉलर के शेयरों की बिक्री पर भारत में कैपिटल गेन टैक्स देय होगा। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय टैक्स संधियों के इस्तेमाल और ‘इंडायरेक्ट ट्रांसफर’ से जुड़े मामलों में एक ऐतिहासिक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मॉरीशस स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म टाइगर ग्लोबल इंटरनेशनल III होल्डिंग्स और उसकी सहयोगी कंपनियों को वर्ष 2018 में फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स से राहत दी थी। यह हिस्सेदारी अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट को बेची गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश को पलटते हुए आयकर विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब टाइगर ग्लोबल ने फ्लिपकार्ट सिंगापुर में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट से जुड़े एक विदेशी निवेशक को बेची थी। फ्लिपकार्ट सिंगापुर, फ्लिपकार्ट इंडिया की होल्डिंग कंपनी है। टाइगर ग्लोबल की मॉरीशस स्थित इकाइयों ने फ्लिपकार्ट इंडिया के शेयर सीधे तौर पर नहीं बेचे, बल्कि फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयरों का ट्रांसफर किया। इसी आधार पर इसे ‘इंडायरेक्ट ट्रांसफर’ बताते हुए टैक्स से छूट का दावा किया गया था।
आयकर विभाग ने इस संरचना को टैक्स बचाने की योजना करार देते हुए चुनौती दी थी। विभाग ने करीब 14,500 करोड़ रुपये (लगभग 1.7 अरब डॉलर) की टैक्स मांग उठाई और मॉरीशस से जारी टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) को भी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विदेशी निवेशकों के बीच TRC की विश्वसनीयता और टैक्स प्लानिंग पर नई बहस छिड़ गई है।
एक्सपर्ट्स की राय
3one4 कैपिटल के को-फाउंडर सिद्धार्थ पाई के मुताबिक, इस फैसले के बाद टैक्स विभाग मॉरीशस आधारित कंपनियों के एग्जिट मामलों की कहीं ज्यादा बारीकी से जांच करेगा। उन्होंने कहा कि भले ही कई फंड मैनेजर अब सिंगापुर, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) या GIFT IFSC जैसे विकल्पों की ओर शिफ्ट हो चुके हों, लेकिन मॉरीशस में पहले से मौजूद निवेश संरचनाओं को लेकर निवेशकों और उनके सलाहकारों को अपने टैक्स रिस्क का दोबारा आकलन करना होगा और आवश्यक प्रावधान करने पड़ सकते हैं।













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