डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, शासन और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन की घोषणा की है। इस बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की सूची जारी की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर सहित कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हैं।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ ट्रंप की व्यापक 20-सूत्रीय शांति योजना का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करना, गाजा में स्थायी शांति स्थापित करना, पुनर्निर्माण को गति देना और क्षेत्र में समृद्धि लाना है। योजना अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जिसमें हमास का शासन से हटना, पूर्ण निरस्त्रीकरण और एक गैर-राजनीतिक, तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना शामिल है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी समर्थन से गठित गाजा की फिलिस्तीनी तकनीकी समिति की पहली बैठक शुक्रवार को मिस्र की राजधानी काहिरा में हुई। समिति के प्रमुख अली शाथ, जो गाजा से ताल्लुक रखने वाले इंजीनियर और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के पूर्व अधिकारी हैं, ने कहा कि समिति तुरंत काम शुरू करेगी। उन्होंने माना कि गाजा के पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली में लगभग तीन वर्ष लग सकते हैं। शुरुआती चरण में प्राथमिकता तत्काल मानवीय जरूरतों पर होगी, खासकर विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी और स्थायी आवास की व्यवस्था पर। मिस्र के सरकारी चैनल अल-काहेरा न्यूज़ से बातचीत में अली शाथ ने कहा कि फिलिस्तीनी जनता लंबे समय से ऐसे किसी ढांचे की प्रतीक्षा कर रही थी, जो उन्हें इस तबाही से उबार सके।
राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा में नागरिक प्रशासन संभालने के लिए इस तकनीकी समिति के प्रयासों का समर्थन किया है। 10 अक्टूबर को लागू हुए संघर्षविराम के बाद इजरायली सेना गाजा के कुछ इलाकों से पीछे हटी, जिससे हजारों विस्थापित फिलिस्तीनी अपने तबाह हो चुके घरों की ओर लौट सके। हालांकि, आगे की राह अब भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। सबसे बड़ी चुनौतियों में संघर्षविराम की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और हमास के निरस्त्रीकरण जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएं शामिल हैं।
ट्रंप की योजना के तहत गाजा में रोजमर्रा के प्रशासन का जिम्मा अली शाथ के नेतृत्व वाली तकनीकी समिति संभालेगी, जबकि इसकी समग्र निगरानी ट्रंप के नेतृत्व में गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा। व्हाइट हाउस के अनुसार, आने वाले समय में बोर्ड के अन्य सदस्यों की भी घोषणा की जा सकती है।
बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में निम्न सदस्य शामिल हैं—
- डोनाल्ड ट्रंप – अमेरिकी राष्ट्रपति (अध्यक्ष)
- मार्को रुबियो – अमेरिकी विदेश मंत्री
- जेरेड कुशनेर – ट्रंप के दामाद और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार
- स्टीव विटकॉफ – मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत
- सर टोनी ब्लेयर – ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री
- अजय बंगा – विश्व बैंक के अध्यक्ष
- मार्क रोवन – अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ
- रॉबर्ट गेब्रियल – अमेरिकी उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
ट्रंप ने इस निकाय को “कभी भी, कहीं भी गठित किया गया सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड” बताया है। बोर्ड के प्रत्येक सदस्य को शासन क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय कूटनीति, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षण, बड़े पैमाने पर फंडिंग और पूंजी जुटाने जैसे अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अन्य अहम नियुक्तियां
- निकोलाय म्लादेनोव, बुल्गारिया के वरिष्ठ राजनेता और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व मध्य पूर्व दूत, को गाजा के लिए हाई रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया गया है। वे बोर्ड की ओर से जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी करेंगे।
- अमेरिकी मेजर जनरल जास्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है, जो सुरक्षा बहाल करने, शांति बनाए रखने और आतंक-मुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
- गाजा में दैनिक प्रशासन के लिए नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) का गठन किया गया है, जिसके प्रमुख अली शाथ हैं। यह समिति गैर-राजनीतिक और तकनीकी होगी तथा हमास के स्थान पर सार्वजनिक सेवाओं का संचालन करेगी।
ट्रंप की यह गाजा योजना पिछले वर्ष अक्टूबर में शुरू हुई थी, जिसके तहत युद्धविराम और शेष बंधकों की रिहाई संभव हुई। नवंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2803 पारित कर इस योजना और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को समर्थन दिया।
हालांकि, टोनी ब्लेयर की नियुक्ति को लेकर विवाद भी सामने आया है। वर्ष 2003 के इराक युद्ध में उनकी भूमिका के कारण मध्य पूर्व में वे एक विभाजनकारी व्यक्तित्व माने जाते हैं। ट्रंप ने पहले ही कहा था कि वे ब्लेयर को पसंद करते हैं, लेकिन क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता का आकलन किया जाएगा।
कई विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने इस बोर्ड को औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित ढांचा बताया है, क्योंकि एक विदेशी नेता गाजा के शासन की निगरानी करेगा। फिलहाल फिलिस्तीनी गुटों और हमास की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। योजना के तहत हमास ने शासन छोड़ने पर सहमति जताई है, लेकिन निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर असहमति अब भी बनी हुई है।













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