नौकरी और तकनीक के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर एक नई और गंभीर बहस शुरू हो चुकी है। दुनिया के प्रमुख निवेश बैंक Goldman Sachs की हालिया रिपोर्ट ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन तकनीकें कुल कार्य घंटों के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को अपने दायरे में ले सकती हैं। सरल शब्दों में कहें तो हर चार घंटे के काम में से एक घंटा इंसानों के बजाय मशीनों द्वारा किया जा सकता है।
यह आकलन US Department of Labor के आंकड़ों और ऐतिहासिक तकनीकी बदलावों के पैटर्न के आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इससे पूर्ण बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना नहीं है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति नई तरह की नौकरियों को जन्म देती रही है।
Goldman Sachs रिपोर्ट की प्रमुख निष्कर्ष
Goldman Sachs के विश्लेषक Joseph Briggs और Sarah Dong द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आधारित ऑटोमेशन अगले कुछ वर्षों में वैश्विक कार्यबल की संरचना को गहराई से प्रभावित करेगा। रिपोर्ट के अनुसार:
- AI और ऑटोमेशन से श्रम उत्पादकता में लगभग 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
- तकनीकी बदलावों के कारण कुछ नौकरियों में विस्थापन होगा, लेकिन कुल नौकरी नुकसान 6–7 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान है।
- यदि AI का प्रभाव तेजी से और व्यापक स्तर पर लागू होता है, तो बेरोजगारी दर में औसतन 0.6 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो सकती है, जो लगभग 10 लाख नए बेरोजगारों के बराबर मानी जा रही है।
किन नौकरियों पर पड़ेगा अधिक असर
रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि AI का प्रभाव सभी क्षेत्रों में समान नहीं होगा। खासतौर पर वे कार्य, जो दोहराव वाले, नियम-आधारित या रूटीन निर्णयों पर निर्भर हैं, वहां ऑटोमेशन की गति अधिक तेज होगी। उदाहरण के तौर पर:
- डेटा एनालिसिस और प्रोसेसिंग
- क्लेरिकल वर्क, डेटा एंट्री और बेसिक रिपोर्टिंग
- रूटीन कंप्यूटेशन और स्टैंडर्ड ऑपरेशनल टास्क
AI इन कार्यों को अधिक तेजी, सटीकता और निरंतरता के साथ कर सकता है, जिससे लागत घटेगी और दक्षता बढ़ेगी।
नई नौकरियों की संभावना
Goldman Sachs की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि AI को केवल नौकरी खत्म करने वाली तकनीक के रूप में नहीं देखा गया है। विश्लेषकों और विशेषज्ञों का मानना है कि AI काम को समाप्त नहीं करेगा, बल्कि उसकी प्रकृति को बदलेगा। जैसे-जैसे ऑटोमेशन बढ़ेगा, वैसे-वैसे नई भूमिकाएँ, नई स्किल्स और नई इंडस्ट्रीज़ उभरेंगी।
भविष्य में ऐसे प्रोफेशन की मांग बढ़ सकती है जो AI मैनेजमेंट, डेटा इंटरप्रिटेशन, क्रिएटिव थिंकिंग, रणनीतिक निर्णय और मानवीय संवेदनशीलता से जुड़े हों—ऐसे क्षेत्र जहां मशीनें अभी भी इंसानों का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकतीं।
निष्कर्ष
AI और ऑटोमेशन रोजगार बाजार के लिए एक चुनौती भी है और अवसर भी। यह बदलाव न तो पूरी तरह नकारात्मक है और न ही पूरी तरह सकारात्मक। असली सवाल यह है कि सरकारें, कंपनियाँ और कर्मचारी इस परिवर्तन के लिए कितनी तेजी और समझदारी से खुद को तैयार करते हैं। जो अर्थव्यवस्थाएँ स्किल अपग्रेडेशन, री-स्किलिंग और शिक्षा पर निवेश करेंगी, वही AI युग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल कर पाएँगी।












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