डेस्क : नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया रवि काना की मंडल कारागार, बांदा से रहस्यमय रिहाई का मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में है। इस घटना के बाद पुलिस टीमें और एसओजी लगातार उसके सुराग तलाश रही हैं, लेकिन अभी तक उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिली है। वहीं, सियासी गलियारों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर एक निजी चैनल की रिपोर्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार पर तंज कसा। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि भाजपा राज में “शासन-प्रशासन और दुशासन” की तिकड़ी आपस में इतनी उलझी हुई है कि इसका नेटवर्क भ्रष्टाचार और लेन-देन से भरा हुआ है। उन्होंने इसे सरकार के बजाय “भाजपा द्वारा बिछाई गई भूमिगत पाइपलाइन और बेईमानी की अंडरग्राउंड केबल” करार दिया।
जेल प्रशासन की कार्रवाई और न्यायालय की भूमिका
मंडल कारागार बांदा से रवि काना की रिहाई के मामले में गौतम बुद्धनगर के सीजेएम न्यायालय ने जेल अधीक्षक को 6 फरवरी तक शपथ पत्र के जरिए स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए थे। न्यायालय ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा था कि इसे गैंगस्टर के फरार कराने का केस माना जा सकता है।
इसके बाद जेलर, जेल अधीक्षक और एक डिप्टी जेलर पर निलंबन की कार्रवाई की गई। वर्तमान में जेल अधीक्षक का चार्ज जेलर आलोक कुमार के पास है। जेल सूत्रों के अनुसार, जेलर ने न्यायालय को रवि काना की रिहाई की पूरी घटना, समय और साक्ष्यों सहित रिपोर्ट भेज दी है।
मौजूदा स्थिति में एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी इस मामले की जांच में जुटी हुई है। न्यायालय के रुख के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।













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