वॉशिंगटन : अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार को H1B वीजा योजना को समाप्त करने के लिए नया विधेयक पेश किया है। स्ट्यूबी का कहना है कि यह योजना अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देती है, जिससे स्थानीय लोगों के अवसरों पर असर पड़ता है। उन्होंने इस विधेयक की घोषणा करते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा।
इस नए प्रस्तावित कानून का नाम ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ है, जिसे संक्षेप में ‘एक्साइल एक्ट’ कहा जा रहा है। इस विधेयक के जरिए आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम में बदलाव कर H1B वीजा योजना को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव है। स्ट्यूबी का कहना है कि विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देना अमेरिकी मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इससे अमेरिकी युवाओं और कर्मचारियों के अधिकारों का हनन होता है।
विधेयक की खास बातें:
स्ट्यूबी के कार्यालय के अनुसार, एक्साइल एक्ट H1B वीजा प्रोग्राम को खत्म करने के लिए आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के सेक्शन 214(जी)(1)(ए) में संशोधन करेगा। इसके तहत साल 2027 से हर वित्तीय वर्ष में H1B वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी।
H1B वीजा क्या है?
H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और वित्त जैसे क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों को काम पर रखने की अनुमति देता है।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य:
H1B वीजा योजना को शुरू इसलिए किया गया था ताकि विशेष योग्यता वाले विदेशी विशेषज्ञ अमेरिका में काम कर सकें। समय के साथ यह योजना भारत और चीन के पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का बड़ा रास्ता बन गई है। हालांकि, नौकरियों, वेतन और आव्रजन नीति को लेकर यह लगातार राजनीतिक बहस का विषय रही है।
भारतीय पेशेवरों पर असर:
H1B वीजा का सबसे अधिक उपयोग भारतीय पेशेवरों द्वारा किया जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, H1B वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवा कर्मचारियों की है। इसलिए, इस बिल के पारित होने पर भारतीय आईटी और तकनीकी पेशेवरों पर सीधा असर पड़ेगा।
अभी विधेयक की प्रक्रिया जारी:
यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी संसद के निचले सदन, प्रतिनिधिसभा में पेश किया गया है। अभी तक इस पर कोई बहस नहीं हुई है और न ही मतदान की कोई तारीख तय की गई है। अब यह बिल संबंधित हाउस कमेटी को भेजा जाएगा, जो तय करेगी कि विधेयक पर औपचारिक सुनवाई होगी या नहीं। प्रतिनिधिसभा से पारित होने के बाद बिल अमेरिकी सीनेट में जाएगा।
H1B वीजा फीस में वृद्धि:
पिछले साल 21 सितंबर से ट्रंप सरकार ने H1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) कर दी है। व्हाइट हाउस के मुताबिक यह बढ़ी हुई फीस केवल एक बार आवेदन के समय देनी होगी। इससे पहले वीजा फीस 5.5 से 6.7 लाख रुपए थी और यह तीन साल के लिए वैध होती थी।













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