डेस्क : अमेरिका की सर्वोच्च अदालत द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आयात शुल्क संबंधी आदेश को असंवैधानिक ठहराए जाने के बाद भारत की राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में सरकार की स्थिति कमजोर हो गई है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने देशहित से समझौता किया है और अब वह व्यापार समझौते की शर्तों पर सख्त रुख अपनाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद सरकार को अपनी रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए।
गौरतलब है कि Supreme Court of the United States ने अपने फैसले में कहा कि व्यापक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार अमेरिकी संविधान के तहत केवल कांग्रेस को प्राप्त है। अदालत के इस निर्णय को राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीति के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। इससे अमेरिका द्वारा अन्य देशों के साथ प्रस्तावित या प्रचलित व्यापार व्यवस्थाओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारत में विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि अमेरिकी प्रशासन की टैरिफ नीति पर कानूनी अनिश्चितता बनी रहती है, तो भारत को अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने से पहले स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई है कि किसी भी जल्दबाजी का असर भारतीय किसानों, सूक्ष्म-लघु उद्योगों और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी अदालत के निर्णय के बाद भारत को आयात उदारीकरण से जुड़े किसी भी कदम पर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट और स्थिर नीति संकेत न मिलें, तब तक समझौते को स्थगित रखना देशहित में होगा।
सरकार की ओर से इस विषय पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में उत्पन्न यह कानूनी स्थिति भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं की गति और स्वरूप को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक विमर्श में यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है।













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