बेंगलुरु: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि पार्टी को भविष्य के लिए नए खून और नई सोच की आवश्यकता है। उन्होंने पुरानी पीढ़ी को हमेशा सत्ता में बने रहने वाला नहीं माना और पहली बार विधायक बने नेताओं को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने का समर्थन किया।
मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में शिवकुमार ने कहा, “पार्टी को नए खून और नई सोच की जरूरत है। मैं नए खून का समर्थन करता हूं। पुरानी पीढ़ी हमेशा नहीं रह सकती।”
यह टिप्पणी कांग्रेस नेताओं द्वारा नवनिर्वाचित विधायकों के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में प्रतिनिधित्व की मांग के संदर्भ में आई है। पहले ही कांग्रेस विधायक राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखकर न्यूनतम पांच नवनिर्वाचित विधायकों को मंत्री पद देने की मांग कर चुके हैं। विधायकों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि “कर्नाटक की जनता ने पहली बार कांग्रेस पार्टी से विधानसभा के लिए 38 नए सदस्यों को चुना है और वे विधानसभा में नए युवा चेहरों को देखना चाहते हैं।”
दलित मुख्यमंत्री के मुद्दे पर शिवकुमार का जवाब
उपमुख्यमंत्री ने दलित मुख्यमंत्री को लेकर अपने सहयोगी एच सी महादेवप्पा की टिप्पणी पर कहा कि उन्हें राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की कोई जानकारी नहीं है। शिवकुमार ने कहा, “मैंने महादेवप्पा का बयान सुना। वह हमारे आलाकमान हैं और शायद उन्हें इस बारे में कुछ जानकारी हो। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को दिल्ली बुलाया है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें कोई कॉल नहीं आया है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया, “मुझे अपने विभाग से संबंधित कुछ काम के लिए दिल्ली जाना है।”
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मंत्रियों के बयानों पर चुप्पी की आलोचना के सवाल पर शिवकुमार ने कहा, “मंत्रियों और विधायकों को नियंत्रित करना मुख्यमंत्री का काम है। मैं पार्टी को इसकी जानकारी देने का काम कर रहा हूं।”













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