डेस्क: चीन ने BRICS समूह को और प्रभावशाली बनाने की अपनी महत्वाकांक्षा जताते हुए भारत से समर्थन की अपील की है। भारत 2026 में इस समूह की अध्यक्षता संभालेगा, जबकि चीन 2027 में अध्यक्ष पद ग्रहण करेगा। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और BRICS को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
द्विपक्षीय संबंधों में सुधार का संकेत
वांग यी ने बताया कि पिछली बार रूस के कज़ान में हुई BRICS बैठक और तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के नए संकेत दिए हैं। इसके परिणामस्वरूप व्यापार और लोगों के बीच संपर्क में बढ़ोतरी हुई है।
BRICS में सहयोग की अपील
चीन ने जोर देकर कहा कि भारत और चीन को BRICS शिखर सम्मेलन में एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। वांग यी के अनुसार यह साझेदारी दोनों देशों और ग्लोबल साउथ के साझा हितों के लिए लाभकारी होगी।
सीमा तनाव और शांति पर जोर
पूर्वी लद्दाख में वर्षों तक चले सैन्य गतिरोध के बावजूद हाल के समय में वीज़ा और उड़ान सेवाओं की बहाली ने बातचीत को फिर से सक्रिय किया है। वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने और शांति एवं स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की यह अपील BRICS को मजबूत बनाने के साथ-साथ भारत‑चीन संबंधों में स्थिरता लाने का संकेत भी है। भारत की 2026 में अध्यक्षता उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। BRICS में सहयोग बढ़ने से व्यापार, निवेश और विकासशील देशों के हितों के लिए नई पहल संभव हो सकती है।
हालांकि सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी भी मौजूद हैं, फिर भी बातचीत और सहयोग की यह पहल क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।













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