डेस्क : पंजाब विधानसभा में कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के विवादित बयान ने राज्य की राजनीति में भूकंप जैसी स्थिति पैदा कर दी है। खैहरा ने महिलाओं को ₹1,000 मासिक सहायता देने वाली राज्य सरकार की योजना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राशि पर्याप्त नहीं है और कुछ महिलाएं इसे लेकर “गिद्दा” कर रही हैं। उनका यह बयान महिलाओं के सम्मान पर सवाल उठाने वाला बताया जा रहा है और विपक्ष सहित सत्तारूढ़ दल ने इसे कड़ी निंदा की है।
विधानसभा में हंगामा
खैहरा के इस विवादित बयान के बाद AAP की महिला विधायक सदन में खड़ी होकर विरोध में नारे लगाने लगीं। इससे विधानसभा का माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही फिर शुरू होने पर सरकार ने खैहरा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने बहुमत से पारित कर दिया।
सत्तापक्ष और विपक्ष में बयानबाजी का तूफान
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैहरा के बयान को महिलाओं की गरिमा पर हमला बताते हुए इसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करने योग्य कहा। वहीं, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने खैहरा से माफी मांगने का दबाव डाला, लेकिन खैहरा ने अपनी बात पर अड़ा रहकर कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया है और सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना उनका अधिकार है।
महिला आयोग ने लिया मामला गंभीरता से
पंजाब राज्य महिला आयोग ने खैहरा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस जारी किया है और आदेश दिया है कि दोनों 12 मार्च तक जवाब दें। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला के सम्मान को ठेस न पहुंचे, इसे सुनिश्चित किया जाएगा।
राजनीतिक असर
इस विवाद ने विधानसभा में सत्तारूढ़ AAP और विपक्ष कांग्रेस के बीच सियासी लड़ाई को और तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह मामला आगामी चुनावों में भावनात्मक मुद्दा बन सकता है और दोनों दल इसे अपनी राजनीतिक रणनीति में इस्तेमाल कर सकते हैं।













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