दक्षिण एशिया इन दिनों हिंसा और संघर्ष की आग में झुलस रहा है। एक तरफ अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला तेज कर रखा है, वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भी गंभीर सैन्य झड़प जारी है। फरवरी 2026 के अंत से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, और पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान में हवाई हमले कर रहा है।
भारत की दृष्टि से यह केवल दो पड़ोसी देशों के बीच की टकराहट नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महत्वपूर्ण घटनाक्रम है जो देश की पश्चिमी सीमा, ऊर्जा सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई को सीधे प्रभावित कर सकता है।
भारत के लिए रणनीतिक अवसर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय तक गहरी मित्रता रही है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हमेशा अपने रणनीतिक हितों को मजबूत करने की कोशिश की। लेकिन हालात अब उसके नियंत्रण से बाहर हैं। पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका तालिबान से लगा है। तालिबान, जो कभी इस्लामाबाद का प्रॉक्सी माना जाता था, अब अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद डूरंड रेखा को मान्यता देने से इनकार कर रहा है।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह संघर्ष भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर पैदा करता है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए जा रहे हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है और खुद को अफगानी संप्रभुता के रक्षक के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
भारत के लिए सुरक्षा और कूटनीति का महत्व
मौजूदा युद्ध में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। टीटीपी एक उग्रवादी समूह है, और पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान उसे आश्रय देता है। भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार की तरह है।
पहली चिंता यह है कि किसी भी तरह से आईएसआईएस-के या अल-कायदा जैसे आतंकवादी समूह भारत की सीमा पर फिर से सक्रिय न हों। दूसरी ओर, भारत अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में नई दिल्ली ने 2026-27 के बजट में अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता को 150 करोड़ रुपए तक बढ़ाया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अफगानिस्तान मजबूत बना रहे और कोई भी आतंकी संगठन उसकी धरती से भारत को निशाना न बना सके।
पाकिस्तान के हमलों और अफगान प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने पूरे अफगानिस्तान में आतंकवादी ठिकानों और उनके नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए हवाई हमले किए हैं। पाकिस्तान के अनुसार, यह ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’ 26 फरवरी को शुरू हुआ था और अब भी जारी है। पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई अफगान तालिबान बलों द्वारा पाकिस्तान की 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर किए गए कथित हमलों के जवाब में की गई।
हालांकि, अफगान सरकार ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। काबुल में एक पुनर्वास अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले में कम से कम 400 लोगों की मौत होने की सूचना है। अफगान अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे अब भी 50 से अधिक शव फंसे हुए हैं।
‘टोलोन्यूज’ ने अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से बताया कि बचाव अभियान जारी है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का दावा है कि उसने काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और फ़ितना अल-ख्वारिज के ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया। इन ठिकानों में तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के भंडारण शामिल थे, जिनका उपयोग पाकिस्तान के अनुसार आतंकवादियों द्वारा निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।
नतीजा और आगे की संभावनाएँ
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक योजनाओं पर भी प्रत्यक्ष प्रभाव डाल रहा है। भारत अब इस स्थिति का उपयोग करके अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और आतंकवाद को सीमा पार फैलने से रोकने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।
साथ ही, यह संघर्ष पाकिस्तान के रणनीतिक हितों को कमजोर कर रहा है और भारत को इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रहा है।













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