डेस्क: ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इज़रायल के साथ तनाव कम करने या युद्धविराम के प्रस्तावों को ठुकराते हुए स्पष्ट कहा है कि दोनों देशों को हराना आवश्यक है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, दो मध्यस्थ देशों ने ईरान को तनाव कम करने के लिए प्रस्ताव दिए थे, लेकिन खामेनेई ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह “शांति का समय नहीं” बल्कि दुश्मनों को जवाब देने और युद्ध तेज करने का समय है।
उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक:
सूत्रों के अनुसार, अपने पहले उच्च-स्तरीय सुरक्षा सत्र में खामेनेई ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ सख्त प्रतिशोध की बात कही। इस बीच, इज़रायल ने दावा किया कि उसने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की अर्धसैनिक इकाई ‘बसीज’ के प्रमुख जनरल गुलाम रज़ा सुलेमानी को एक हवाई हमले में मार गिराया है। इज़रायल ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लीजरानी को भी मारने का दावा किया है, हालांकि उनकी स्थिति को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आ रही हैं।
इज़रायली मंत्री का बयान:
इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने कहा कि दोनों ईरानी नेताओं को “कल रात मार गिराया गया।” इससे पहले, आईडीएफ ने कहा था कि उसने सोमवार को जनरल गुलाम रज़ा सुलेमानी पर हमला किया था। आईडीएफ ने बयान में कहा: “ईरान में आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान, खासकर हाल के दिनों में जब प्रदर्शन तेज हुए, सुलेमानी की कमान में बसीज बलों ने दमन अभियानों का नेतृत्व किया, जिसमें गंभीर हिंसा, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और आम नागरिकों के खिलाफ बल का प्रयोग शामिल था।”
ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी:
रिपोर्ट्स के अनुसार, दूसरी तरफ ईरान ने इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं और खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों को निशाना बनाया है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा में एक तेल सुविधा पर हमला भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर असर डाल रहा है।
नेतृत्व पर लगातार हमले, फिर भी सख्त रुख:
हाल के हफ्तों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया है, जिससे नेतृत्व ढांचे को झटका लगा है। इसके बावजूद तेहरान का रुख और अधिक सख्त होता दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति युद्ध को और लंबा और जटिल बना सकती है। फिलहाल, सर्वोच्च नेता का यह बयान संकेत देता है कि किसी भी तरह की शांति या समझौते की संभावना बेहद कम है। बढ़ते सैन्य हमले, नेतृत्व पर हमले और तेल ठिकानों पर निशाना साधे जाने से यह संघर्ष वैश्विक संकट की ओर बढ़ रहा है।













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