माले: गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे मालदीव ने एक बार फिर भारत से वित्तीय सहयोग की उम्मीद जताई है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप व्यवस्था की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि विदेशी मुद्रा संकट और बढ़ते कर्ज भुगतान दबाव से राहत मिल सके।
रिपोर्टों के अनुसार, मालदीव इस समय भारी बाहरी ऋण, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और कमजोर पड़ती अर्थव्यवस्था जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन क्षेत्र पर निर्भर है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ा है। वहीं, ईंधन कीमतों में वृद्धि से सरकारी व्यय भी बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, माले प्रशासन ने भारत से पहले प्रदान की गई करेंसी स्वैप सुविधा जारी रखने का अनुरोध किया है। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निकासी अंतराल, रोलओवर सीमा और अन्य शर्तों के कारण नई सहायता प्रक्रिया सरल नहीं होगी।
भारत इससे पहले भी मालदीव को आर्थिक सहायता देता रहा है। अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा वर्ष 2025 में दो ब्याजमुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई थी, जिससे मालदीव को अस्थायी राहत मिली थी।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी मालदीव की वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 तक देश पर लगभग 1 अरब डॉलर के कर्ज दायित्व थे, जिनमें सुकुक बॉन्ड भुगतान और भारत से जुड़े स्वैप दायित्व भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मालदीव को नई वित्तीय राहत नहीं मिलती, तो आने वाले महीनों में उसकी अल्पकालिक आर्थिक चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
