कन्याकुमारी: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को मणिपुर में जारी हिंसा और देश की राजनीति को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मणिपुर की मौजूदा स्थिति के लिए सत्ताधारी दल जिम्मेदार है और वहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
तमिलनाडु के कोलाचेल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर कभी शांतिपूर्ण राज्य था, लेकिन अब वहां गंभीर संकट की स्थिति है। उन्होंने कहा, “मणिपुर में जो कुछ हुआ है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक शांत राज्य को संघर्ष में झोंक दिया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और आज भी वहां तनाव जारी है।”
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मणिपुर में हाल ही में एक 5 वर्षीय बच्चे और उसकी 5 माह की बहन की उग्रवादी हमले में मौत के बाद तनाव और बढ़ गया है। इस घटना के बाद कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए, मुख्य सड़कों को अवरुद्ध किया गया और कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और धुएं के गोले छोड़े।
गौरतलब है कि मणिपुर में हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी, जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भड़के थे। इसके बाद मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच व्यापक टकराव हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई, बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि वह राज्यों की सत्ता को केंद्र से नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी रणनीति के तहत अन्नाद्रमुक को भी प्रभावित किया गया है।
उन्होंने कहा, “भाजपा जहां भी संभव होता है, वहां राज्यों की सत्ता को दिल्ली से नियंत्रित करने का प्रयास करती है। तमिलनाडु में वे सीधे यह बात नहीं कह सकते, इसलिए एक ऐतिहासिक पार्टी को कमजोर कर दिया गया।”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि अन्नाद्रमुक ने तमिलनाडु के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज वह अपनी मूल पहचान खो रही है और कमजोर हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का मानना है कि भारत के हर राज्य को अपनी भाषा, संस्कृति और शासन व्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार होना चाहिए, जबकि भाजपा एक केंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को एक ही चरण में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला द्रमुक के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले एनडीए के बीच माना जा रहा है, जिसमें भाजपा और पीएमके भी सहयोगी दल के रूप में शामिल हैं।













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