नई दिल्ली : सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग का उनके प्रथम राजकीय भारत दौरे पर गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ली के जीवन को संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। इस दौरान आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ली का भारत आना अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह दोनों देशों के बीच साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति सम्मान दोनों देशों की समान आधारशिला है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के संबंध अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं और अब यह साझेदारी “भविष्य-उन्मुख” दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया “चिप्स से लेकर शिप्स तक, तकनीक से लेकर प्रतिभा तक और ऊर्जा से लेकर पर्यावरण तक” हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर साझा विकास की ओर अग्रसर होंगे।
आर्थिक संबंधों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है और 2030 तक इसे 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई नई पहलें शुरू की गई हैं। इनमें भारत–कोरिया वित्तीय मंच, औद्योगिक सहयोग समिति और आर्थिक सुरक्षा संवाद शामिल हैं, जिनका उद्देश्य निवेश और औद्योगिक सहयोग को गति देना है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए भारत में प्रवेश आसान बनाने हेतु कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। साथ ही, भारत–कोरिया व्यापार समझौते को अगले एक वर्ष में उन्नत करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
इस उच्चस्तरीय वार्ता और समझौतों के साथ दोनों देशों ने अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा भविष्य की साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया।













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