डेस्क : देश में स्वास्थ्य बीमा लेने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में अगले 12 से 18 महीनों के भीतर लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, बीमा कंपनियां लगातार बढ़ते मेडिकल खर्च, अस्पतालों की महंगी सेवाओं और बढ़ते क्लेम के कारण अपने प्रीमियम ढांचे में संशोधन करने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 के बाद से इलाज की लागत में लगातार इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर बीमा पॉलिसियों पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल महंगाई (मेडिकल इन्फ्लेशन) करीब 14 से 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो सामान्य महंगाई दर से कहीं अधिक है। इसके अलावा बढ़ती उम्र की आबादी, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां और निजी अस्पतालों पर बढ़ती निर्भरता भी लागत बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
पिछले कुछ वर्षों में भी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। कई पॉलिसियों के दाम 2023 से 2025 के बीच 20 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ चुके हैं, जिससे आम उपभोक्ता पर दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में बीमा लेना और अधिक महंगा हो सकता है, हालांकि इसके साथ बीमा कंपनियां कवर और सुविधाओं में भी बदलाव कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में यह संभावित बढ़ोतरी आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, खासकर उन परिवारों के लिए जो पहले से ही बढ़ते चिकित्सा खर्चों से जूझ रहे हैं।













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