नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने कूटनीतिक और रणनीतिक संपर्कों को और तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को बताया कि यह कदम मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विदेशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के कल्याण को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर, खाड़ी देशों के साथ उच्चस्तरीय संवाद और यात्राओं को बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना, व्यापारिक हितों की रक्षा करना और क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न खाड़ी देशों के संपर्क में हैं। यह कूटनीतिक सक्रियता उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता के बादल बने हुए हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की रणनीति का फोकस कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखना है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। साथ ही, लगभग एक करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी खाड़ी देशों में रहते हैं, जिनकी सुरक्षा और हित भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा हैं।
एमईए ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित देशों के साथ संपर्क में रहकर किसी भी संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता भारत की “ऊर्जा कूटनीति” और “प्रवासी सुरक्षा नीति” का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बदलते वैश्विक हालात में देश की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।













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